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NAVY SUPPORT VESSEL:सबमरीन को साइलेंट किलर कहा जाता है. यह किसी भी दुश्मन के वॉरशिप को आसानी से निशाना बना सकती है. लेकिन अगर यह किसी दुर्धटना का शिकार होता है तो उसे रेस्क्यू करने के लिए जरूरत होती है डायविंग …और पढ़ें
समंदर में नौसेना की ताकत में होगा इजाफा
हाइलाइट्स
- INS निस्तर 18 जुलाई को नौसेना में शामिल होगा.
- INS निस्तर 1971 में गाजी सबमरीन को ढूंढने वाला वेसल है.
- INS निस्तर 80% स्वदेशी कंटेंट से बना है.
इतिहास दोहराएगा निस्तर
INS निस्तर उस सबमरीन रेस्क्यू वेसल का नया अवतार है जिसने 1971 की जंग में विशाखापत्तनम नेवल बेस के पास डूबे पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS गाजी पर डाइविंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था. उसी का नया अवतार नौसेना में शामिल होने जा रहा है. 22 सितंबर 2022 को विशाखापत्तनम में दोनों शिप निस्तर और निपुण को लॉन्च किया गया था. इसकी खासियत की बात करें तो यह पूरी तरह से स्वदेशी शिप है. इस शिप को समुद्र के अंदर हुए किसी भी हादसे के वक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. डीप सी डाइविंग सपोर्ट वेसल पर DSRV (डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल) भी मौजूद होगा. DSV किसी भी सबमरीन रेस्क्यू ऑपरेशन में राहत बचाव के लिए डिजाइन किया गया है. यह शिप 120 मीटर लंबा है. कुल 200 से ज्यादा नौसैनिक इस पर रह सकते हैं और यह दो महीने तक लगातार समंदर में ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. इसका कुल वजन 9350 टन है. इस शिप से हेलिकॉप्टर ऑपरेशन को भी अंजाम दिया जा सकेगा. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटे की स्पीड से समंदर में मूव कर सकता है. खास बात यह है कि यह 80 फीसदी स्वदेशी कंटेंट से बना है.
भारतीय नौसेना के सबमरीन ऑपरेशन लगातार जारी हैं. अगर सबमरीन के साथ कोई दुर्घटना होती है तो उसे रेस्क्यू करने के लिए यह वेसल लॉन्च किया जाएगा. भारतीय नौसेना ने दो डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) की खरीद की थी. इन DSRV को ये सपोर्ट वेसल कैरी करेंगे और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए निकल जाएंगे. निस्तर और निपुण को ईस्ट और वेस्ट कोस्ट पर तैनात किया जाएगा. इन दोनों सपोर्ट वेसल से किसी भी डीप सी रेस्क्यू मिशन को आसानी से अंजाम दिया जा सकेगा. अभी तक जरूरत पड़ने पर नौसेना ONGC और अन्य कंपनियों के बोट को हायर करती थी. इनके नौसेना में शामिल होने के बाद नौसेना की ताकत में इजाफा होगा. भारत इन दोनों के आने के बाद दूसरे देशों की भी मदद कर सकता है.
भारतीय सबमरीन की बढ़ रही है क्षमता
दुनिया में फिलहाल तीन तरह की सबमरीन हैं: डीजल इलेक्ट्रिक पावर्ड सबमरीन, डीजल इलेक्ट्रिक पावर्ड सबमरीन AIP और न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन. भारत के पास 17 डीजल इलेक्ट्रिक पावर्ड सबमरीन और 2 बैलेस्टिक मिसाइल न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन हैं. भारतीय नौसेना को उनकी न्यूक्लियर पावर्ड अटैक सबमरीन (SSN) की मंजूरी भी मिल गई है. जब अंडर वॉटर ऑपरेशन बढ़ रहे हैं तो उनके सपोर्ट के लिए वेसल की भी जरूरत थी. अगर हम पाकिस्तान के सबमरीन फ्लीट की बात करें तो फिलहाल उसके पास 5 सबमरीन हैं. चीन से 8 सबमरीन की खरीद कर चुका है. इनमें से 4 कराची में तैयार हो रही हैं और 4 चीन में बन रही हैं. साल 2027 तक सभी 8 सबमरीन पाकिस्तान को मिलने की संभावना है
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