छतरपुर। जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने एक ऐसे नाजुक मोड़ पर छतरपुर की कमान संभाली है, जहाँ खाकी की साख दांव पर लगी है। उनके सामने केवल अपराधियों को पकड़ना ही चुनौती नहीं है, बल्कि विभाग की उस जर्जर हो चुकी छवि को भी सुधारना है, जो भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों से घिरी हुई है। श्री सकलेचा के लिए छतरपुर की काँटों भरी राह पर सफल होने के लिए सबसे पहले अपने ही महकमे की सर्जरी करनी होगी। लेकिन छतरपुर की भौगोलिक और राजनैतिक तासीर उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगी।
विभाग के विभीषणों और थानों की वसूली पर प्रहार
एसपी के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा घर के भेदियों को पहचानने की है। जिले के कई थानों में बैठे कुछ पुलिसकर्मी और रसूखदार विभीषण मुखबिर का काम अपराधियों के लिए कर रहे हैं। चर्चाएं आम हैं कि जुआ, सट्टा और अवैध शराब के अड्डों से होने वाली महीने की बंधी-बंधाई वसूली ने पुलिस के इकबाल को खत्म कर दिया है। नवागत एसपी को थानों में चल रहे इस वसूली तंत्र को ध्वस्त करना होगा ताकि आम जनता का विश्वास पुलिस पर बहाल हो सके।
राजनैतिक हस्तक्षेप से खुद को बचाना सबसे बड़ी जंग
छतरपुर की पुलिसिंग में राजनैतिक दखलंदाजी एक कड़वी सच्चाई रही है। सफेदपोशों के दबाव में फर्जी एफआईआर दर्ज कराना और अपने विरोधियों को प्रताड़ित करना यहाँ के थानों का पुराना ढर्रा है। श्री सकलेचा के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को इस राजनैतिक चक्रव्यूह से बाहर रखने की होगी। क्या वे राजनेताओं के फोन कॉल को दरकिनार कर निष्पक्ष न्याय कर पाएंगे? यह सवाल जिले की गलियों में तैर रहा है।
अवैध उत्खनन और भू-माफियाओं का जाल
छतरपुर जिला खनिज संपदा से समृद्ध है, लेकिन यही समृद्धि यहाँ के लिए अभिशाप भी बनी है। केन नदी से लेकर पहाड़ की चोटियों तक फैले अवैध रेत और पत्थर उत्खनन पर लगाम लगाना नए एसपी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। भू-माफियाओं द्वारा सरकारी और निजी जमीनों पर किए जा रहे कब्जों ने आम जनता के बीच पुलिस की इकबाल को कम किया है। इन माफियाओं के राजनैतिक रसूख को नजरअंदाज कर निष्पक्ष कार्रवाई करना उनके लिए अग्निपरीक्षा होगी।
अवैध कारोबार और माफियाओं पर नकेल
जिले में गाँव-गाँव तक फैली अवैध शराब की पैठ और शहर के पॉश इलाकों से लेकर कस्बों तक चल रहे जुआ-सट्टा के कारोबार ने युवा पीढ़ी को बर्बाद कर दिया है। इन अवैध कारोबारों को अक्सर सत्ता और महकमे के कुछ लोगों का मौन समर्थन प्राप्त रहता है। नवागत एसपी को इन माफियाओं के आर्थिक साम्राज्य पर चोट करनी होगी, तभी अपराध की जड़ें कमजोर होंगी।
अपराधियों में खौफ और जनता में सुरक्षा का भाव
वर्तमान में आवश्यकता इस बात की है कि पुलिस का खौफ अपराधियों में हो, न कि थानों में अपनी फरियाद लेकर आने वाले पीड़ितों में। थानों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाना और निचले स्तर पर संवाद को मानवीय बनाना एक बड़ी जिम्मेदारी है। रजत सकलेचा की कार्यक्षमता और अनुभव पर संदेह नहीं है, लेकिन छतरपुर के पेचीदा हालात और सिस्टम में लगी दीमक से निपटना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगा। अब देखना यह है कि वे खाकी के दामन पर लगे दागों को धोकर उसे कितना चमकदार और विश्वसनीय बना पाते हैं।









