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जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला. (फाइल फोटो)उन्होंने “सबसे अधिक हाशिए पर” पर रह रहे लोगों को न्याय प्रदान करने में कानूनी सेवाओं के लिए अपनी सरकार के समर्थन को दोहराते हुए कहा, “हमें संविधान में किये वादों को वास्तविक जमीन पर उतारने के लिए आवश्यक हर संस्थागत, वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन का विषय रक्षा कर्मियों और जनजातीय समुदायों के अधिकारों और हकों पर केन्द्रित है, जो समाज के दो वर्गों को छूता है – रक्षाकर्मी जो अडिग संकल्प के साथ संविधान की रक्षा करते हैं, और जनजातीय लोग जो लंबे समय से इसके पूर्ण रूप से अंगीकार होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि न्याय संस्थाएं तेजी, संवेदनशीलता और मजबूती के साथ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए आगे आएं.”
इस बीच, कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अब्दुल्ला ने 1999 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को याद किया और उनके बलिदान की सराहना की. उन्होंने कहा, “आज, विजय दिवस के पावन अवसर पर, मैं अपने भूतपूर्व और वर्तमान रक्षा कर्मियों की सेवा और बलिदान को स्वीकार करते हुए अपनी बात शुरू करना चाहता हूं. इन पुरुषों और महिलाओं ने, जिनमें से कई जम्मू-कश्मीर के थे, सुदूर, दुर्गम इलाकों में शांति से गरिमा और कर्तव्य की स्थायी भावना के साथ सेवा की.”
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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