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Kolkata Law College Gangrape Case Live Updates: हॉकी स्टिक, डॉक्यूमेंट्स… साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज से क्या-क्या हुआ जब्त?

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Kolkata Law College Gangrape Live Updates: कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में एक सनसनीखेज गैंगरेप केस ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर दिया है. कॉलेज की पहली वर्ष की छात्रा के साथ कैंपस के अंदर एक पूर्व छात्र और दो सीनियर छात्रों ने कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया. पीड़िता की शिकायत पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अदालत ने उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

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इस मामले में मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा है, जो 2022 में कॉलेज से पासआउट हुआ था और अलीपुर कोर्ट में प्रैक्टिस करता है. यही नहीं, वह कॉलेज की तृणमूल छात्र परिषद इकाई का पूर्व अध्यक्ष और टीएमसी छात्र संगठन की दक्षिण कोलकाता इकाई का संगठन सचिव भी रह चुका है. सोशल मीडिया पर उसके कई फोटो सत्तारूढ़ टीएमसी नेताओं के साथ वायरल हो चुके हैं.

कॉलेज प्रशासन ने माना है कि आरोपी को हाल ही में 45 दिनों की अनुबंध पर नॉन-टीचिंग स्टाफ के रूप में नियुक्त किया गया था. जबकि पुलिस ने बताया कि दो अन्य आरोपी कॉलेज के मौजूदा छात्र हैं और पीड़िता के सीनियर हैं.

घटना 25 जून की शाम की है. छात्रा को कॉलेज बुलाकर कुछ फॉर्म भरवाने के बहाने रोका गया और बाद में कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित गार्ड रूम में ले जाकर रात 10 बजे तक गैंगरेप किया गया. इस दौरान हॉकी स्टिक जैसी वस्तुओं के इस्तेमाल और पीड़िता की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी आरोप है.

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी उस पर शादी के लिए दबाव बना रहा था, और इनकार करने पर उसे कैंपस में ही बंधक बनाकर रेप किया गया. इतना ही नहीं, गैंगरेप के दौरान उसका वीडियो बनाकर धमकी दी गई कि यदि उसने किसी को बताया तो यह वीडियो इंटरनेट पर डाल दिया जाएगा.

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल जब्त कर लिए हैं और फॉरेंसिक जांच की जा रही है कि कहीं यह वीडियो दूसरों को भेजा तो नहीं गया. घटना के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लिया है और तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी है.

इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार भी कटघरे में हैं. उप-प्राचार्य डॉ. नयना चटर्जी ने कहा कि उन्हें पुलिस से सूचना मिली कि कॉलेज के दो कमरे सील कर दिए गए हैं और वे यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर हुआ क्या है.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज़ हैं. कांग्रेस और एआईडीएसओ के कार्यकर्ताओं ने कस्बा थाने के बाहर प्रदर्शन किया जिसे पुलिस ने बलपूर्वक हटाया. टीएमसीपी अध्यक्ष त्रिनंकुर भट्टाचार्य ने कहा कि आरोपी कभी संगठन का इकाई अध्यक्ष नहीं रहा.

टीएमसी ने इस घटना को ‘दर्दनाक’ बताते हुए कहा कि इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. मंत्री शशि पांजा ने कहा कि राज्य सरकार पीड़िता और उसके परिवार के साथ है. उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ममता सरकार अपराधियों को माला नहीं पहनाती और महिलाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं करती.

बंगाल में महिला सुरक्षा पहले ही संवेदनशील मुद्दा है, और अब यह मामला विपक्ष को एक नया हथियार दे सकता है. वहीं, पीड़िता के लिए त्वरित न्याय और कॉलेज कैम्पस में सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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