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कोलंबिया में राष्ट्रपति उम्मीदवार मिगुएल उरीबे पर हमला: अमेरिका को साज़िश की आशंका.

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Miguel Uribe Turbay Shot: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिगुएल उरीबे टर्बे को चुनावी रैली के दौरान गोली मार दी गई. इसके बाद उनकी मां डायना टर्बे की वो कहानी भी दोबारा सुर्खियों में आ गई, जब उनकी संदिग्ध मौत एक ऑपर…और पढ़ें

पाब्लो एस्कोबार के चंगुल से छुड़ाने में मारी गई मां, मिगुएल से कौन था परेशान?

मिगुएल उरीबे की मां डायना टर्बे.

हाइलाइट्स

  • मिगुएल उरीबे टर्बे को चुनावी रैली में गोली मारी गई.
  • मिगुएल की मां डायना टर्बे साहसी पत्रकार थीं.
  • डायना टर्बे का अपहरण और मौत आज भी रहस्य है.

कोलंबिया में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिगुएल उरीबे टर्बे को शनिवार को बोगोटा में एक चुनावी रैली के दौरान गोली मारी गई, तो पूरी दुनिया चौंक गई. वे सभा में चुनावी भाषण दे रहे थे, तभी हमला हुआ. मिगुएल को तीन गोलियां लगीं, जिनमें से दो उनके सिर में थीं. उनकी पत्नी मारिया क्लाउडिया ताराजोना ने बताया कि वे ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं. पुलिस ने इस हमले के सिलसिले में 15 साल के एक नाबालिग लड़के को गिरफ्तार किया गया है.

हालांकि यह कहानी सिर्फ एक हमले की नहीं है, इसके पीछे वो परिवार है, जिसकी पीढ़ियां कोलंबिया के अखबारों और टीवी की सुर्खियों में रह चुकी हैं. मिगुएल उरीबे टर्बे भी इसी कड़ी का एक हिस्सा हैं. यह कहानी उस परिवार की जो कोलंबिया की राजनीति, पत्रकारिता और अपराध के खिलाफ जंग में न सिर्फ शामिल रहा, बल्कि अपनी जान पर भी खेल गया.

अमेरिका ने जताई साज़िश की आशंका

मिगुएल उरीबे पर हुए हमले के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने न सिर्फ घटना की निंदा की है बल्कि ये सीधा लोकतंत्र के लिए खतरा है. उन्होंने प्रेसिडेंट पेट्रो पर निशाना साधते हुए कहा कि ये वामपंथी उकसावे का परिणाम है और उन्हें इस पर लगाम लगानी चाहिए. उन्होंने मिगुएल के परिवार के प्रति संवेदना ज़ाहिर की और कहा कि जिन्होंने ये अपराध किया है, उसको सज़ा मिलनी चाहिए.

मिगुएल की मां डायना टर्बे थीं साहसी पत्रकार

मिगुएल उरीबे की मां डायना टर्बे, कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति जूलियो सेसर टर्बे की बेटी थीं. वे एक साहसी पत्रकार थीं जिन्होंने ‘होय एक्स होय’ नाम की एक पत्रिका चलाई और ड्रग माफिया की हिंसा को सनसनीखेज बनाने से इनकार कर दिया. उस दौर में यह एक असाधारण फैसला था. 30 अगस्त 1990 को उन्हें एक साक्षात्कार के बहाने बुलाया गया और पाब्लो एस्कोबार के करीबी लॉस प्रिस्कोस गुरिल्ला समूह ने उनका अपहरण कर लिया. उनके साथ अन्य पत्रकारों और कैमरामैन रिचर्ड बेसेरा को भी अगवा किया गया.

डायना टर्बे की दुखद मौत

उन्हें मेडेलिन के पास एक गुप्त फार्महाउस में बंदी बनाकर रखा गया. वहां से उन्होंने छिपकर पत्रों की तस्करी की और अन्य पत्रकारों की रिहाई में मदद की और यहां तक कि अपने अपहरणकर्ताओं का सम्मान भी जीत लिया. 25 जनवरी 1991 को बिना उनके परिवार को सूचित किए कोलंबियाई पुलिस ने एक बचाव अभियान चलाया. उनका ये अभियान विफल रहा और डायना टर्बे को पीठ में गोली लगी. इस हमले में उनका जिगर और बायां गुर्दा क्षतिग्रस्त हो गया. कैमरामैन बेसेरा को सुरक्षित बचा लिया गया लेकिन डायना की मौत हो गई.



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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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