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रूस से भारत में निवेश में 300% की बढ़ोतरी, सरकार ने बताए आंकड़े

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रूस ने वित्तीय वर्ष 2025 में भारत में 18.45 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जो पिछले वर्ष से 300 प्रतिशत अधिक है. हालांकि, भारत में कुल विदेशी निवेश में गिरावट आई है.

रूस ने भर दी भारत की झोली, 3 गुना ज्‍यादा क‍िया इन्‍वेस्‍ट, सरकार ने बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लाद‍िमीर पुत‍िन. (File Photo)

हाइलाइट्स

  • जंग में होने के बावजूद रूस ने 300 प्रतिशत से ज़्यादा इन्‍वेस्‍टमेंट क‍िया भारत में.
  • 2025 में, रूसी निवेशकों ने भारत में 18.45 मिलियन डॉलर का निवेश किया.
  • हालांक‍ि, टोटल एफडीआई के आंकड़ों में ग‍िरावट देखने को मिली है.

रूस हमेशा भारत का मजबूत दोस्‍त रहा है. जब भी जरूरत पड़ी साथ आया. लेकिन इस बार उसने जंग के हालात होने के बावजूद भारत की झोली भर दी है. सरकार की ओर से संसद की जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025 में, रूसी निवेशकों ने भारत में 18.45 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जो वित्तीय वर्ष 2024 के 5.16 मिलियन डॉलर के आंकड़े से 300 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी है.

हालांक‍ि, भारत में विदेशी निवेश में वित्तीय वर्ष 2025 (अप्रैल-दिसंबर) में गिरावट देखने को मिली है. यह जानकारी लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों से मिली है. 2024 के आखिरी 9 महीनों में भारत में 62.48 बिलियन डॉलर का FDI आया, जबकि वित्तीय वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 71.27 बिलियन डॉलर और वित्तीय वर्ष 2023 में 71.35 बिलियन डॉलर था. कुल FDI में इक्विटी इनफ्लो, गैर-बैंकिंग संस्थाओं की इक्विटी पूंजी, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी योगदान शामिल हैं. पिछले कुछ वित्तीय वर्षों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. वित्तीय वर्ष 2024 में 41.04 बिलियन डॉलर का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया था.

सरकार कर रही प्रयास
भारत सरकार ने FDI को आकर्षित करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए हैं, जिसमें एक उदार निवेश ढांचा स्थापित करना और ज़्यादातर क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के तहत 100% FDI की अनुमति देना शामिल है. निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए रक्षा, दूरसंचार, ई-कॉमर्स, नागरिक उड्डयन, फार्मास्यूटिकल्स, बीमा, डिजिटल मीडिया और कोयला खनन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए गए हैं. FPI के लिए, सरकार ने प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े सुधार पेश किए हैं.

सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदम इस प्रकार हैं.
* FPI के लिए ऑनबोर्डिंग और पंजीकरण प्रक्रियाओं को सरल बनाना.
* भारत में एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) में व्यापार करने के लिए FPI को मंज़ूरी.
* भारत के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSC) में स्थित सेबी-पंजीकृत FPI में अनिवासी भारतीयों (NRI), प्रवासी भारतीय नागरिकों (OCI) और निवासी भारतीयों के लिए भागीदारी का विस्तार.
* पुनर्वर्गीकरण ढांचा, विशिष्ट शर्तों के तहत FPI निवेश को FDI में परिवर्तित करने की अनुमति देता है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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