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बंग्लादेश बॉर्डर से चलती थी ट्रेन, पैंट्री से नोएडा आता था सामान, 2 युवक करते थे पूरा खेल

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नई दिल्ली: ट्रेन की रसोई यानी पैंट्री कार से चल रहा था मादक पदार्थों का ऐसा खेल, जिसमें न कोई कोड वर्ड था, न शक की गुंजाइश. बंग्लादेश बॉर्डर से सटे पश्चिम बंगाल के कूचबिहार से निकलती ट्रेन में रखा जाता था ‘सामान’—जो दिल्ली तक पहुंचता था… और फिर दो बाइक टैक्सी चालक उसे नोएडा और आसपास की गलियों में बांटते थे. यह कोई वेब सीरीज़ की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस की ताजा गिरफ्तारी से सामने आई चौंकाने वाली हकीकत है.

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9 जून को दिल्ली के द्वारका सेक्टर 18 में BSES कार्यालय के पास पुलिस ने दो युवकों को पकड़ा—मंजू हुसैन और रकीब मियां. उम्र सिर्फ 24 साल. दोनों ऐप-बेस्ड बाइक टैक्सी चलाते थे. लेकिन असल में थे ड्रग नेटवर्क के नए मोहरे.

बैग से बरामद हुआ 28.781 किलो गांजा
पुलिस ने इनके बैग से बरामद किए 28.781 किलो गांजा. पूछताछ में खुलासा हुआ कि माल पश्चिम बंगाल के कूचबिहार से लाया गया था, जो बंग्लादेश बॉर्डर से कुछ किलोमीटर दूर है. तस्करी का रास्ता सीधा—ट्रेन की पैंट्री कार.

पैंट्री बनी ‘हरियाली की थाली’
आपको लगेगा रसोईयान में तो रोटियां, सब्ज़ी और चाय बनती है. लेकिन इस गिरोह ने उस रसोई को ही बना लिया था ‘ड्रग डिपो’. भारी बैग में छिपाकर गांजा रखा जाता था. जिसे रसोई में रखकर आराम से दिल्ली लाया जाता था. ना कोई पूछताछ, ना चेकिंग! दिल्ली पहुंचते ही बाइक टैक्सी के ज़रिए होता था डिलीवरी का खेल—स्पॉट: नोएडा, उत्तम नगर, द्वारका जैसे इलाके.

‘बाइक-बॉय’ बना ड्रग डिलीवरी एजेंट!
इन दोनों युवकों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. दिखने में सामान्य डिलीवरी एजेंट, लेकिन पीछे से गांजे की पूरी खेप सप्लाई कर रहे थे. पुलिस का कहना है कि यही वजह थी कि ये इतने वक्त तक बचते रहे.

इससे पहले भी बड़ी बरामदगी
दिल्ली पुलिस की इसी टीम ने मई में 176 किलो गांजा जब्त किया था. इसमें तीन लोग पकड़े गए थे. लगता है ये गिरोह एक ही जड़ से निकला है, जो पूर्वोत्तर भारत से दिल्ली तक अपना जाल फैला चुका है.

केस दर्ज, नेटवर्क की तलाश जारी
इन दोनों आरोपियों पर NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. अब पुलिस उन लोगों की तलाश कर रही है जो—

  • पैंट्री में गांजा रखते हैं
  • दिल्ली में रिसीव करते हैं
  • आगे लोकल सप्लाई में जुड़े हैं
  • डीसीपी अंकित सिंह ने कहा, “पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं, और जल्दी ही और भी गिरफ्तारियां होंगी.”

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    Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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