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पैसा नहीं, पानी बचाना है! 90% दृष्टिहीन होकर भी यह शख्स हर साल 1 लाख लीटर पानी बचा रहा

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World Water Day 2025: महेंद्रसिंह झाला, जिनकी दृष्टि केवल 10% है, ने अपने घर में जल संग्रहण का प्रोजेक्ट शुरू किया और हर मानसून में एक लाख लीटर पानी का संग्रह करते हैं.

पैसा नहीं, पानी बचाना है! 90% दृष्टिहीन यह शख्स हर साल 1 लाख लीटर पानी बचा रहा

राजकोट के वॉटर मैन!

हाइलाइट्स

  • महेंद्रसिंह झाला ने जल संग्रहण प्रोजेक्ट शुरू किया.
  • हर मानसून में 1 लाख लीटर पानी का संग्रह करते हैं.
  • छत पर 7 प्रकार की टंकियां बनाई हैं.

राजकोट: कहते हैं कि अगर मन में ठान लो तो कुछ भी असंभव नहीं है. राजकोट के वॉटर मैन महेंद्रसिंह झाला ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. उन्होंने कई चुनौतियों का सामना करके अपनी मंजिल हासिल की है. महेंद्रसिंह झाला की दृष्टि भले ही सीमित हो, लेकिन उनके मन का विजन कई बाधाओं को दूर करने में सक्षम है.

शुरुआत से ही महेंद्रसिंह झाला का लक्ष्य लोगों को पानी की कमी से मुक्त करना था. इसी लक्ष्य के साथ वे आगे बढ़े. महेंद्रसिंह ने हार माने बिना अपने घर में जल संग्रहण का प्रोजेक्ट शुरू किया और इसमें सफलता पाई. वे भविष्य की पीढ़ी को संपत्ति नहीं, बल्कि पानी की सौगात दे रहे हैं. महेंद्रसिंह हर मानसून में एक लाख लीटर पानी का संग्रह करते हैं. वे बताते हैं, “लोग अपने बच्चों के लिए पैसे बचाते हैं, लेकिन मैं पानी बचाता हूँ ताकि भविष्य की पीढ़ी को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े.”

पानी संग्रह के लिए छत पर बनाई 7 प्रकार की टंकी
वॉटर मैन महेंद्रसिंह झाला ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपने घर की छत पर 7 अलग-अलग प्रकार की टंकियां बनाई हैं और उन्हें पाइपलाइन से जोड़ा है. इन टंकियों में 12,000 लीटर पानी का संग्रह होता है और जब पानी ओवरफ्लो होता है, तो वह पाइपलाइन से नीचे भूगर्भ में चला जाता है. महेंद्रसिंह हर साल पानी उतारते हैं और यह अक्सर ओवरफ्लो हो जाता है.

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उन्होंने हर पाइप में फिल्टर लगाए हैं ताकि पानी भूगर्भ में जाते समय शुद्ध हो और उसमें कचरा न जाए. महेंद्रसिंह का मानना है कि, “सबको पानी बचाने की प्रतिज्ञा लेनी ही होगी, नहीं तो भविष्य में पानी की कमी हो जाएगी.”

1992 में महेंद्रसिंह झाला वॉलीबॉल खेल रहे थे. तब उनकी आंखों में गंभीर चोट लगी थी, जिससे धीरे-धीरे उन्होंने दृष्टि खो दी. वे आईटीआई में सुपरवाइजिंग इंस्ट्रक्टर के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन दृष्टि खोने के कारण 2013 में इस्तीफा देना पड़ा. 90% दृष्टि खोने के बाद उन्हें सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन वे निराश नहीं हुए. हार माने बिना, उन्होंने अपने घर में जल संग्रहण का प्रोजेक्ट शुरू किया और सफलता पाई है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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