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दिल्ली में गिरफ्तार नक्‍सली युवती की अनकही कहानी.

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10 साल की उम्र में हथियार थामने वाली नक्सली युवती को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 4 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया. वह झारखंड में वांछित थी और दिल्ली में नई पहचान के साथ रह रही थी.

10 की उम्र में थामा हथियार, 2020 में मिला मिशन दिल्‍ली, नक्‍सली युवती की कहानी

हाइलाइट्स

  • दिल्ली में 23 साल की नक्सली महिला गिरफ्तार.
  • महिला ने 10 साल की उम्र में हथियार थामा था.
  • महिला पर झारखंड में गंभीर आरोप थे.

Naxalites’ Mission Delhi: दिल्ली की रातें चुप थीं, जैसे हमेशा होती थीं, लेकिन 4 मार्च 2025 को एक छिपी हुई सच्चाई उभर आई, जिसने पुलिस की सारी नजरें अपनी ओर मोड़ लीं. क्राइम ब्रांच की टीम के लिए यह एक महत्वपूर्ण पल था. एक महिला, जो पिछले कई सालों से दिल्ली में एक नई पहचान के साथ रह रही थी, आखिरकार गिरफ्तारी के घेरे में आ गई थी. 23 साल की यह नक्सली महिला, जो अब तक न सिर्फ अपनी पहचान को छुपाकर दिल्ली में जीवन यापन कर रही थी, बल्कि उस पर झारखंड के सोनुआ पुलिस स्टेशन में एक गंभीर मामले में वांछित होने का आरोप भी था.

एक खतरनाक खेल
कई महीनों से दिल्ली क्राइम ब्रांच की ER-I टीम एक गुप्त सूचना पर काम कर रही थी. कहा जा रहा था कि एक माओवादी दिल्ली के एनसीआर क्षेत्र में छुपकर रह रहा है. इसी बीच, 4 मार्च को इंस्पेक्टर लिचमण और एसआई देवेंद्र को एक विश्वसनीय सूचना मिली कि एक महिला अपनी असली पहचान छुपाकर पितामपुरा के महाराणा प्रताप एंक्लेव में रह रही है, वह असल में एक खतरनाक नक्सली है.

यह सूचना मिलते ही, पूरी टीम ने गहरी साजिश को उजागर करने की योजना बनाई. इंस्पेक्टर लिचमण की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें एसआई देवेंद्र, प्रभात, जितेंद्र और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे. सभी ने दिल्ली क्राइम ब्रांच के डीसीपी विक्रम सिंह के मार्गदर्शन में एक सटीक ऑपरेशन तैयार किया. एक बार फिर पुलिस का खुफिया नेटवर्क काम आया, और महिला को आखिरकार उसके ही घर से गिरफ्तार कर लिया गया.

गिरफ्तार महिला की सच्चाई: एक अंधेरी राह की शुरुआत
गिरफ्तार महिला का जन्म झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुदाबुरु गांव में 1 जनवरी 2002 को हुआ था. एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ी इस महिला का जीवन एक साधारण सा था, लेकिन उसकी किस्मत कुछ और ही चाहती थी. जब वह महज 10 साल की थी, एक माओवादी संगठन ने उसे अपनी ओर खींच लिया. उसे एक बेहतर जीवन, भोजन, और सुरक्षा का वादा किया गया, और फिर उसने सीपीआई माओवादी संगठन में शामिल होने का निर्णय लिया.

2016 में, उसने खुद को माओवादी प्रशिक्षण के कैंप में पाया, जहां उसने पांच साल तक कठिन ट्रेनिंग ली. उसकी ट्रेनिंग में उसे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल सिखाया गया, जिनमें INSAS राइफल, SLR, LMG, और हैंड ग्रेनेड जैसे खतरनाक हथियार शामिल थे. झारखंड पुलिस के साथ तीन बड़े मुठभेड़ों में भाग लेने के बाद, उसने दिल्ली में छुपकर एक नई पहचान बनाने का रास्ता चुना.

2020 में, उसे अपने कमांडर के आदेश पर दिल्ली आना पड़ा, और यहां उसने एक नई पहचान बनाई. नोएडा और दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हाउस क्लीनर के रूप में काम करते हुए, वह पीतमपुरा में एक सामान्य जीवन जीने लगी, बिना किसी को अपनी असलियत का पता चलने दिया. लेकिन अब उसकी किस्मत ने पलटी खाई और पुलिस के जाल में फंस गई.

एक दर्दनाक सच
आरोपी महिला पर झारखंड के सोनुआ पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 19 के तहत गंभीर आरोप थे. उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या के प्रयास, आतंकवादी गतिविधियों और विस्फोटक अधिनियम जैसी धाराएं शामिल थीं. 26 मार्च 2023 को झारखंड के चाईबासा कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था, और अब वह कानून के शिकंजे में फंस चुकी थी. गिरफ्तारी के बाद, आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 41.1 के तहत गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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