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दिल्‍ली में क्‍या खिचड़ी पका रहे अरविंद केजरीवाल, बनाएंगे एंटी कांग्रेस गुट? एक मुलाकात ने बढ़ाई सियासी गर्मी – arvind kejriwal anti congress morcha architecht aditya thackeray sanjay raut meet aap convener

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Arvind Kejriwal News: हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद दिल्‍ली चुनाव ने विपक्षी इंडिया ब्‍लॉक की एकता की पोल खोल कर रख दी. अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी दिल्‍ली में करारी हार के लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार ठहरा…और पढ़ें

दिल्‍ली में क्‍या खिचड़ी पका रहे अरविंद केजरीवाल, बनाएंगे एंटी कांग्रेस गुट?

अरविंद केजरीवाल ने आदित्‍य ठाकरे से मुलाकात की है.

हाइलाइट्स

  • आदित्‍य ठाकरे ने अरविंद केजरीवाल से दिल्‍ली में मुलाकात की है
  • दोनों नेताओं के बीच विपक्षी इंडिया ब्‍लॉक के भविष्‍य पर बात हुई
  • संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी भी आदित्‍य ठाकरे के साथ थे

नई दिल्‍ली. देश की राजधानी दिल्‍ली में विधानसभा चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद विपक्षी खेमे की एकजुटता पर एक बार फिर से गंभीर सवाल उठे हैं. विपक्षी मोर्चा बीजेपी से टक्‍कर लेने में सक्षम है या नहीं इसपर भी बहस तेज हो गई है. हरियाणा के बाद दिल्‍ली के विधानसभा चुनावों ने लोकसभा चुनाव से पहले बने इंडिया ब्‍लॉक को ही सवालों के घेरे में ला दिया है. हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में सहमति नहीं बन सकी थी. दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. इसके बाद दिल्‍ली में भी इन दोनों पार्टियों के बीच चुनावी गठजोड़ नहीं बन सका. दोनों जगहों पर बीजेपी ने जोरदार तरीके से जीत हासिल की है. अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का मानना है कि कांग्रेस के रवैये के चलते उसे चुनाव में हार मिली. दूसरी तरफ, कांग्रेस भी आप को पुराने दिन याद दिलाते हुए जोरदार हमला बोला है. इन सबके बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता आदित्‍य ठाकरे ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की है. इस मौके पर संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी भी मौजूद रहीं.

अरविंद केजरीवाल और आदित्‍य ठाकरे की मुलाकात के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है. महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, एनसीपी-एसपी और शिवसेना (यूबीटी) ने मिलकर महा विकास अघाड़ी के बैनर तले चुनाव लड़ा था. इसके बावजूद विरोधी खेमे को करारी हार का सामना करना पड़ा था. कांग्रेस प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. अब दिल्‍ली में कांग्रेस का एक बार फिर से खाता बंद ही रहा. महाराष्‍ट्र चुनाव के बाद इंडिया ब्‍लॉक के लीडरशिप में बदलाव की मांग ने जोर पकड़ा था. दिल्‍ली चुनाव के बाद कांग्रेस एक बार फिर से कठघरे में है. ऐसे नाजुक मोड़ पर आदित्‍य ठाकरे की अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्‍ली चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद क्‍या विपक्षी खेमा एंटी कांग्रेस मोर्चा बनाने की ओर तेजी से कदम बढ़ाने लगा है?

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आदित्‍य ठाकरे के बयान को समझिए
शिवसेना (UBT) के नेता आदित्‍य ठाकरे ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद महत्‍वपूर्ण बयान दिया है. आदित्‍य ठाकरे ने केजरीवाल से मुलाकात के बाद कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन दोस्‍ती बनी रहनी चाहिए. यहां यह गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई सामान्‍य दोस्‍ती नहीं है. यह राजनीतिक दोस्‍ती है. आदित्‍य ठाकरे के बयान और मौजूदा राजनीतिक हालात को देखा जाए तो इसके गहरे मायने हैं. आदित्‍य ठाकरे का यह बयान भविष्‍य की विपक्ष की राजनीति के बारे में बड़ा संकेत है या नहीं यह तो वक्‍त बताएगा, लेकिन अरविंद केजरीवाल से उनकी यह मुलाकात सामान्‍य नहीं मानी जा सकती है.

‘…रिश्‍ते बने रहते हैं’
अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद बाद आदित्‍य ठाकरे ने कहा, ‘सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन रिश्ते बने रहते हैं. हम दोस्ती के संकेत के तौर पर केजरीवाल से मिले. हालांकि, हमारा लोकतंत्र स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है. चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है.’ इस मौके पर उनके साथ संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी भी थीं. अरविंद केजरीवाल और आदित्‍य ठाकरे के बीच विपक्षी इंडिया ब्‍लॉक के भविष्‍य पर भी चर्चा हुई. बता दें कि दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी 70 में से 48 सीटें जीतकर स्‍पष्‍ट बहुमत हासिल किया है. बीजेपी ने दिल्‍ली की सत्‍ता में 27 साल बाद वापसी की है. दूसरी तरफ, विधानसभा चुनाव में लगातार सफलता हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी के हिस्‍से महज 22 सीटें ही आईं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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