Home देश/विदेश दलाई लामा ने चीन को चुनौती दी, कहा- उत्तराधिकारी स्वतंत्र दुनिया में...

दलाई लामा ने चीन को चुनौती दी, कहा- उत्तराधिकारी स्वतंत्र दुनिया में जन्मेगा

56
0

[ad_1]

Last Updated:

Google search engine

Dalai Lama: तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने चीन को चुनौती देते हुए कहा कि उनका उत्तराधिकारी ‘स्वतंत्र दुनिया’ में जन्म लेगा. चीन ने इसे खारिज किया और दावा किया कि उत्तराधिकारी की मान्यता का अधिकार उसके प…और पढ़ें

दलाई लामा ने क्या दी चीन को चुनौती, उनके दावे से क्यों बौखलाया ड्रैगन

दलाई लामा ने पहली बार कहा है कि उनका उत्तराधिकारी ‘स्वतंत्र दुनिया’ में जन्म लेगा.

हाइलाइट्स

  • दलाई लामा का उत्तराधिकारी ‘स्वतंत्र दुनिया’ में जन्म लेगा
  • चीन ने दलाई लामा के इस दावे को खारिज किया
  • साल 1995 में चीन ने पंचेन लामा को कर दिया था गायब

Dalai Lama: तिब्बतियों के सबसे बड़े आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने चीन को सीधी चुनौती दी है. दलाई लामा ने मंगलवार को जारी हुई ‘वायस फॉर द वायसलेस’ नामक अपनी पुस्तक में लिखा कि दुनिया भर के तिब्बती चाहते हैं दलाई लामा नामक संस्था उनकी मृत्यु के बाद भी जारी रहे. इस किताब में दलाई लामा ने पहली बार विशिष्ट रूप से साफ किया है कि उनका उत्तराधिकारी ‘स्वतंत्र दुनिया‘ में जन्म लेगा, जो चीन के बाहर है. हालांकि, इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनके साथ ही आध्यात्मिक गुरुओं का सिलसिला रुक जाएगा. इससे तिब्बती आध्यात्मिक नेता के पुनर्जन्म को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद फिर से लाइम लाइट में आ गया है.

चीन की बैचेनी की वजह ये है कि 14वें दलाई लामा ने पुष्टि की है कि अगले दलाई लामा का जन्म ‘स्वतंत्र दुनिया’ में होगा. जिससे यह सुनिश्चित होगा कि संस्था चीनी नियंत्रण से परे तिब्बती अधिकारों और आध्यात्मिक नेतृत्व की वकालत करने की अपनी पारंपरिक भूमिका जारी रखेगी. यह बयान बीजिंग के लिए एक सीधी चुनौती है, जो लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि अगले दलाई लामा को मान्यता देने का अंतिम अधिकार उसके पास है. चीन ने तिब्बती नेता की घोषणाओं को खारिज करते हुए जोर दिया है कि किसी भी उत्तराधिकारी को बीजिंग की मंजूरी लेनी होगी.

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान का वो शहर जहां सबसे ज्यादा मचती है होली की धूम, यहां का सांप्रदायिक सौहार्द अपने आप में मिसाल

दलाई लामा 1959 में आ गए थे भारत
मौजूदा 14वें दलाई लामा का मूल नाम तेनजिन ग्यात्सो है. वह 1959 में माओत्से तुंग के वामपंथियों के शासन के खिलाफ विफल विद्रोह करने के बाद 23 वर्ष की आयु में हजारों तिब्बतियों के साथ भागकर भारत आए थे. दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर में रहने वाले ओमान परिवार में हुआ था. बचपन में उनका नाम ल्हामो धोंडुप था. जब वह दो साल के थे, उनकी पहचान 13वें दलाई लामा थुबटेन ग्यात्सो के अवतार के रूप में की गई थी. दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है जिसका मतलब होता है ज्ञान का महासागर. दलाई लामा के वंशज करुणा, अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप माने जाते हैं.

ये भी पढ़ें- मनाने जा रहे हैं होली का जश्न, जान लीजिए व्हिस्की में मिलाएं कितना पानी, 99.9 फीसदी लोग नहीं जानते

कैसे चुने जाते हैं नए दलाई लामा
दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन की परंपरा सदियों से एक गहन आध्यात्मिक प्रक्रिया रही है. नए दलाई लामा की खोज में तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं द्वारा दर्शन, संकेतों और सपनों की व्याख्या करना शामिल है. ऐतिहासिक रूप से, यह प्रक्रिया वरिष्ठ भिक्षुओं द्वारा मृतक दलाई लामा के शरीर में शगुन देखने से शुरू होती है. उदाहरण के लिए, 13वें दलाई लामा की मृत्यु के बाद, उनका शरीर शुरू में दक्षिण की ओर था, लेकिन बाद में पूर्व की ओर मुड़ गया, जिसे इस बात का संकेत माना गया कि उनका पुनर्जन्म उसी दिशा में होगा. एक बार संभावित पुनर्जन्म की पहचान हो जाने पर, बच्चे को कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. जिसमें पिछले दलाई लामा से संबंधित वस्तुओं को पहचानने की क्षमता भी शामिल है. दलाई लामा ने अन्य चिह्नों के अलावा अपने पूर्ववर्ती द्वारा प्रयुक्त अनुष्ठानिक वस्तुओं का भी सही चयन किया था.

ये भी पढ़ें- जिसके कारण हम मनाते हैं होली, उसका पाकिस्तान से है कनेक्शन, कैसे ‘इस्लाम की धरती’ से हुआ रंगोत्सव का आगाज

चीन क्यों कर रहा हस्तक्षेप
फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन का दावा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकार में अंतिम निर्णय उसका होगा. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी दलाई लामा को अलगाववादी मानती है और तिब्बत पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए उनके उत्तराधिकारी को नियंत्रित करना चाहती है. 2011 में, बीजिंग ने घोषणा की कि केवल चीनी सरकार ही अगले दलाई लामा की नियुक्ति कर सकती है. उसने निर्वासित तिब्बती धार्मिक समुदाय द्वारा किए गए किसी भी चयन को अस्वीकार कर दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “जीवित बुद्ध दलाई लामा की वंशावली चीन के तिब्बत में बनी और विकसित हुई, और उनकी धार्मिक स्थिति और नाम भी (चीन की) केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित किया गया था. “धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार 14वें दलाई लामा की पहचान की गई और उत्तराधिकारी को मंजूरी देने के लिए इसे तत्कालीन केंद्रीय सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया.”

ये भी पढ़ें- क्या औरंगजेब की कब्र को हटाना संभव? ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा हासिल, एएसआई करता है देखभाल

पंचेन लामा को गायब कर चुका है चीन
चीन पहले ही तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े आध्यात्मिक व्यक्ति पंचेन लामा पर नियंत्रण कर चुका है. 1995 में जब दलाई लामा ने छह वर्षीय गेधुन चोएक्यी न्यिमा को पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी, तो चीनी अधिकारियों ने उसे अगवा कर लिया. चीन ने अपने उम्मीदवार ग्याइनकैन नोरबू को पंचेन लामा बना दिया. गेधुन चोएक्यी न्यिमा आज तक लापता हैं और उनके बारे में किसी को कुछ भी मालूम नहीं है.

ये भी पढ़ें- सोने की मोहरें बिछाकर खरीदी थी 4 गज जमीन, जिसे माना जाता है दुनिया की सबसे महंगी लैंड डील, किस धर्म का पवित्र स्थान? 

कैसे मुकाबला करेंगे दलाई लामा
अपने उत्तराधिकार में हस्तक्षेप करने के बीजिंग के दृढ़ निश्चय को जानते हुए, दलाई लामा चीन को अपना दलाई लामा स्थापित करने से रोकने के लिए कई उपाय कर सकते हैं. एक संभावना यह है कि वह अपनी मृत्यु से पहले अपने पुनर्जन्म की घोषणा कर दें, जिससे मरणोपरांत खोज की आवश्यकता खत्म हो जाएगी. एक अन्य विकल्प यह है कि उनका उत्तराधिकारी तिब्बत के बाहर, संभवतः भारत में हो, जहां 100,000 से अधिक तिब्बती शरणार्थी रहते हैं. 2004 में टाइम पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “मेरा जीवन तिब्बत के बाहर है, इसलिए तार्किक रूप से मेरा उत्तराधिकारी भी बाहर ही होगा.” यह सच्चाई है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी हमेशा तिब्बत में नहीं पाया गया है. चौथे दलाई लामा, योंतेन ग्यात्सो का जन्म 1589 में मंगोलिया में हुआ था. छठे दलाई लामा, त्सांगयांग ग्यात्सो का जन्म 1682 में भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के तवांग में हुआ था, जो तिब्बत से ज्यादा दूर नहीं है. इसके अलावा, दलाई लामा ने सुझाव दिया है कि अगर तिब्बती लोग परंपरा को खत्म करने का फैसला करते हैं तो दलाई लामा की संस्था की अब जरूरत नहीं रह जाएगी.

homeknowledge

दलाई लामा ने क्या दी चीन को चुनौती, उनके दावे से क्यों बौखलाया ड्रैगन

[ad_2]

Source link

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here