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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया में मौजूद आईएसआईएस आतंकियों को खदेड़ने के आदेश दिए हैं. इनमें से बहुत सारे लड़ाके पाकिस्तान के रहने वाले हैं, जो उत्पात मचाते रहते हैं. अगर ये पाकिस्तान फि…और पढ़ें
डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया से आईएसआईएस आतंकियों को खदेड़ने की बात कही है.
हाइलाइट्स
- अमेरिका ने सीरिया से विदेशी आतंकियों को निकालने का आदेश दिया.
- पाकिस्तान में ISIS आतंकियों के बसने का खतरा इससे बढ़ना तय है.
- भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं. ये एक नए तरह का खतरा होगा.
अमेरिका क्या फिर साउथ एशिया को आतंक की आग में झोंकना चाहता है? यह सवाल इसलिए क्योंकि इसी अमेरिका ने पहले तालिबान को पाला-पोसा. पूरी दुनिया में तबाही मचवाई और फिर जब काम निकल गया तो इसी तालिबान के खिलाफ जंग छेड़ दी. फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा फैसला ले लिया है, तालिबान की तरह पाकिस्तान को कुख्यात आतंकी संगठन ISIS के आतंकियों का पनाहगाह बना देगा. क्योंकि ट्रंप ने सीरिया के नेता के साथ मुलाकात में आदेश दिया है कि वे सीरियाई क्षेत्र से सभी विदेशी नागरिकता वाले आतंकवादियों को बाहर भेज दें. इनमें से ज्यादातर ISIS के आतंकी हैं, जिनके पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के साथ सीधे रिश्ते हैं. ऐसे में उनके पाकिस्तान में आकर बसने का खतरा है. इससे भारत की टेंशन बढ़ सकती है.
सऊदी अरब पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के नेता अहमद अल-शरा उर्फ अबू मोहम्मद अल जुलानी से मुलाकात की. ऐलान किया कि वह सीरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा रहे हैं. लेकिन इसके बाद जारी डॉक्यूमेंट में उन्होंने जुलानी को जो आदेश दिए हैं, उसमें साफ लिखा है कि सीरिया की मौजूदा सरकार सीरियाई क्षेत्र से सभी विदेशी नागरिकता वाले आतंकवादियों को निर्वासित करे. सभी फिलिस्तीनियों को उनके देश वापस भेजा जाए. उन जेलों को अपने कब्जे में लें, जहां ISIS के आतंकवादियों को रखा गया है. इतना ही नहीं, सीरिया में ISIS के फिर से उभरने को रोकने में अमेरिका की सहायता करें. इन फैसलों का भारत पर सीधा असर होने जा रहा है. खासकर अगर आतंकी छोड़े गए तो वे उन्हें पाकिस्तान शरण दे सकता है.
इसे 3 प्वाइंट में समझिए
1. अगर सीरिया में मौजूद ISIS आतंकियों जेलों से छोड़ा गया तो वे फिर से एक्टिव होंगे. कश्मीर और केरल में आईएसआईएस आतंकियों की कोशिशें पहले भी सामने आई हैं. वे बरगलाकर युवाओं को भर्ती करने की कोशिश कर सकते हैं.
2. सीरिया में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य इस्लामी देशों से आए लड़ाके वर्षों से मौजूद हैं. अगर इन्हें निष्कासित किया जाता है और ये अपने-अपने देशों में लौटते हैं तो साउथ एशिया में आतंकवाद फिर से सिर उठा सकता है. यह भारत, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए टेंशन भरा होगा.
3. अगर सीरिया फिलीस्तीनी आतंकियों को निकालता है तो वे हमास के साथ फिर जाकर खड़े हो जाएंगे. यह वही आतंकी संगठन है जिसने इजरायल में कोहराम मचा रखा था. सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था.
समझिए भारत के लिए कितना बड़ा खतरा
आईएसआईएस खुरासान (ISIS-K) ने भी अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है. इसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI सपोर्ट देती है. अगर सीरिया से विदेशी ISIS लड़ाकों को निष्कासित किया जाता है तो पाकिस्तानी मूल के लड़ाके अपने देश लौट सकते हैं. ये लड़ाके खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान या पंजाब जैसे क्षेत्रों में पहले से मौजूद आतंकी नेटवर्कों में शामिल हो सकते हैं. यहां से भारत के खिलाफ साजिशें रच सकते हैं. ये जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों को बढ़ा सकते हैं. हाल के वर्षों में कश्मीर में ISIS से प्रेरित कट्टरपंथियों के भर्ती होने के मामले भी सामने आ चुके हैं.
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें
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