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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025: भारत-चीन संबंध सुधार से यात्रा बहाल

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MANSAROVAR YATRA: पहले कोविड और फिर भारत चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव ने मानसरोवर यात्रा पर ब्रेक लगा दिया था. अब जब रिश्तों की दरारें भरने लगी है तो मानसरोवर यात्रा भी शुरू होने जा रही है. यात्रा का आयोजन…और पढ़ें

4 साल का इंतजार होगा खत्म, कैलाश में फिर गूंजेगा हर हर महादेव

कैलाश में गूंजेगा हर हर महादेव

हाइलाइट्स

  • मानसरोवर यात्रा जल्द शुरू होगी
  • 4 साल बाद फिर से होगी मानसरोवर यात्रा
  • उत्तराखंड से यात्रा 1 हफ्ते में पूरी होगी

MANSAROVAR YATRA: भारत-चीन के बीच जमी बर्फ अब तेजी से पिघलनी शुरू हो रही है. इसकी शुरूआत पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच कजान में वार्ता से हुई. इसका असर जमीन पर भी दिखाई देने लगा है. रिश्तों में सुधार हो रहा है. इसमें सबसे पहला चरण था LAC पर तनाव कम होना. दोनों देशों की सेनाएं अपने अपने इलाके में सामान्य गश्त कर रही है. साथ ही साल 2020 के बाद से बंद मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि चीन के साथ हमारी बात चल रही है. अन्य मुद्दों को धीरे धीरे आगे बढ़ाया जा रहा है. उम्मीद है की कैलाश मानसरोवर यात्रा जल्द शुरू होगी. हम लोग इसकी तैयारी तक रहे हैं. जल्द ही लोगों के लिए नोटिस भी जारी करेंगे.

4 साल से बंद है यात्रा
मानसरोवर यात्रा का आयोजन हर साल जून से सितंबर के बीच होता है. भारत कोरोना के चलते साल 2020 में यह यात्रा बंद हो गई. उसके बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव ने इस यात्रा को शुरू होने नहीं दिया. इस मसले को भारत ने कूटनीतिक स्तर पर चीन के साथ उठाया. मानसरोवर यात्रा पर संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि 18 नवंबर 2024 में रियो डी जिनेरो में G-20 समिट के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी. इस बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का मुद्दा उठाया गया था. इसके बाद पिछले साल 18 दिसंबर को स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी. इसके अलावा 27 जनवरी 2025 को भारत के विदेश सचिव ने चीन के उप विदेश मंत्री से मुलाकात की थी. इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि 2025 के गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया जाएगा.

यात्रा की जमीन ऐसे हुई तैयार
मानसरोवर यात्रा की शुरूआत भारत और चीन के डिप्लोमेटिक रिश्ते के 75 साल पूरे होने के मौके पर हो रहे है. 26 मार्च को बीजिंग में इसी मसले को लेकर दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक हुई थी. दोनों पक्षों ने इसी साल जनवरी में विदेश सचिव और चीनी उप-विदेश मंत्री की बैठक में तय किए गए दिशा निर्देशों की समीक्षा की. इस बात पर सहमति जताई गई कि दोनों देशों के लोगों के बीच ज्यादा संपर्क बढ़ाने की कोशिशों को जारी रखा जाए. इसमें दिल्ली से बीजिंग की सीधी उड़ानों की बहाली, मीडिया और थिंक-टैंक के बीच बातचीत हुई थी. इसके साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने के लिए बनाई गई कार्य योजना पर भी आगे बढ़ने की बात की गई.

उत्तराखंड से 1 हफ्ते में पूरी होगी यात्रा
मानसरोवर यात्रा दो रूट के जरिए आयोजित होती है. पहला है उत्तराखंड के लिपुलेख पास और सिक्किम के नाथुला पास. भारत ने जब भारत ने सामरिक और धार्मिक महत्व की सड़क का निर्माण उत्तराखंड के पिथौरागढ में शुरू किया तो चीन ने नेपाल को उकसाने का काम किया था. यह इलाका एक ट्राई जंक्शन है और यह रूट मानसरोवर भी जाता है. भारतीय यात्रियों की सहूलियत के लिए पिथौरागढ़ से लिपुलेख तक के लिए एक 80 किलोमीटर की लिंक रोड बनाई तो नेपाल के साथ विवाद शुरू हो गया था. सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लिपुलेख तक की सड़क लगभग बनकर तैयार है. इस सड़क के बनने से कैलाश मानसरोवर की यात्रा महज एक हफ्ते में पूरी हो सकेगी. सिक्किम के नाथुला और नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा में 2-3 हफ्ते लग जाते हैं. यात्रा के दौरान 80 प्रतिशत सफर चीन (तिब्बत) में करना पड़ता है और बाकी 20 प्रतिशत भारत में था. लेकिन पिथौरागढ़ की सड़क बनने से अब यह सफर उल्टा हो जाएगा. यानि तब यह यात्रा 84 फीसदी भारत में होगी और मात्र 16 प्रतिशत तिब्बत में. अभी तक कुछ तीर्थ-यात्री लिपुलेख के जरिए भी किया करते थे. सड़क कच्ची होने के चलते इसें समय ज्यादा लगता था.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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