अरविन्द जैन/ छतरपुर। न्याय नहीं तो बांध नहीं का नारा फिलहाल हवाओं में गूंजने से थम गया है, लेकिन बुंदेलखंड की माटी में सुलगते सवालों की राख अभी ठंडी नहीं हुई है। आज जिला कलेक्टर कार्यालय के बंद कमरे में जब कलेक्टर पार्थ जायसवाल और आंदोलनकारी अमित भटनागर के बीच करीब 90 मिनट तक ‘दिमागी शतरंज’ चली, तो नतीजा ‘पॉजिटिव’ निकला। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई, तो ग्रामीणों ने भी संघर्ष को विराम देते हुए सोमवार से प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित कर दिया।
बैठक में कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने साफ किया कि विकास की राह में ग्रामीणों के आंसू नहीं गिरने देंगे।
प्रशासन और प्रभावितों के बीच बनी सहमति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
>महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज की जांच होगी और दोषियों पर गाज गिरेगी।
>पूरे परियोजना क्षेत्र का पुन: सर्वे होगा। विस्थापन की स्थिति में ‘गांव के बदले शानदार गांव’ बसाने का वादा मिला है।
>आदिवासी अधिकारों, महिला अधिकारों और मानवीय पहलुओं को फाइलों से निकालकर जमीन पर लागू किया जाएगा।
>मंदिर, मस्जिद और मठों का ट्रस्ट बनेगा और उचित मुआवजा दिया जाएगा।
इन मांगों को कलेक्टर द्वारा शासन को भेजने का आश्वासन दिया गया-
महिला एवं पुरुष दोनों के संयुक्त नाम पर 5 एकड़ जमीन देने की मांग। महिलाओं के लिए अलग पैकेज राशि का प्रावधान।
अमित भटनागर के तीखे तेवर “झुके नहीं हैं, सिर्फ रुके हैं”
आंदोलन के अगुवा अमित भटनागर ने मीडिया से चर्चा में साफ कर दिया कि यह पूर्णविराम नहीं, बल्कि अल्पविराम है। उन्होंने दो टूक कहा:
“कलेक्टर महोदय की पहल का स्वागत है, संवाद से राहत की उम्मीद जागी है, लेकिन याद रहे—हम डरकर नहीं, न्याय की आस में रुके हैं। अगर वादे सिर्फ कागजों तक सीमित रहे, तो अगली बार आंदोलन इतना व्यापक होगा कि संभालना मुश्किल हो जाएगा। हमारा लक्ष्य न्याय है, और बिना न्याय के बांध की एक ईंट नहीं रखने देंगे।”
प्रशासन की मजबूरी या समझदारी?
केन-बेतवा लिंक परियोजना को सुचारू रखने के लिए प्रशासन को इस समय ‘जनता के सहयोग’ की सख्त जरूरत है। कलेक्टर ने चतुराई और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए फिलहाल टकराव टाल दिया है। 5 एकड़ जमीन और महिलाओं के लिए अलग पैकेज जैसी बड़ी मांगों को शासन स्तर पर भेजने का आश्वासन देकर गेंद अब भोपाल और दिल्ली के पाले में डाल दी गई है।
बैठक में ये रहे मौजूद
प्रशासन की ओर से कलेक्टर पार्थ जायसवाल और एसडीएम विजय द्विवेदी डटे रहे, तो प्रभावितों की ओर से अमित भटनागर के साथ कानून विशेषज्ञ एम.एस. खरे, पार्षद दिव्या अहिरवार और ग्रामीणों के नुमाइंदे शामिल हुए।










