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सलाखें शरीर को रोक सकती हैं, संकल्प को नहीं: जेल से बाहर आते ही गरजे अमित भटनागर

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छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों की प्रखर आवाज़ और जुझारू सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर चार दिनों के कारावास के बाद आज रिहा हो गए। जेल की दहलीज से बाहर कदम रखते ही भटनागर के तेवर और भी तल्ख नजर आए। उन्होंने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को ललकारते हुए कहा, “प्रशासन मेरे शरीर को कैद कर सकता है, लेकिन मेरे संकल्प को नहीं। इन चार दिनों ने मेरे इरादों को और भी फौलादी बना दिया है।”

संघर्ष से संवाद: अब ‘सच’ की परीक्षा जमीन पर होगी

​अमित भटनागर की रिहाई के साथ ही आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। जेल से सीधे प्रभावित गांवों में पहुँचकर भटनागर ने विस्थापितों के साथ बैठक की और एक विस्तृत मांगपत्र तैयार किया। प्रशासन के रुख में भी नरमी देखी जा रही है; कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने दोबारा ग्राम सभा आयोजित करने, विस्थापितों की सूची चस्पा करने और मुआवजे की विसंगतियों को दूर करने का भरोसा दिया है। अमित भटनागर ने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से संवाद के जरिये प्रशासन का सहयोग करेंगे, लेकिन न्याय की शर्त पर कोई समझौता नहीं होगा। कल दोपहर 12 बजे कलेक्टर महोदय के साथ एक निर्णायक वार्ता तय की गई है।

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विस्थापितों ने किया पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत

​जेल के बाहर और प्रभावित गांवों में उत्सव जैसा माहौल रहा। विस्थापितों और समर्थकों ने फूल-मालाओं के साथ भटनागर का भव्य स्वागत किया। इस दौरान ‘सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। भटनागर ने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी केवल जन-आंदोलन को कुचलने की एक नाकाम कोशिश थी, जिससे संघर्ष अब और भी मजबूत हुआ है।

​अपनी रिहाई के बाद अमित भटनागर ने इस संघर्ष में साथ देने वाले सभी दलों और आम जनमानस का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं, आम आदमी पार्टी के सदस्यों और आम नागरिकों का उन विस्थापित महिलाओं का, जो अपनी जमीन और हक के लिए पुलिसिया दमन के सामने ढाल बनकर खड़ी रहीं।

​भटनागर ने अंत में संकल्प दोहराते हुए कहा, “जब तक हर एक प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा और सम्मानजनक विस्थापन नहीं मिल जाता, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। विस्थापितों का आशीर्वाद और सत्य का मार्ग ही मेरी असली ताकत है।”

कल की ‘निर्णायक वार्ता’ पर टिकी सबकी नजरें

​कल दोपहर 12 बजे होने वाली कलेक्टर के साथ बैठक यह तय करेगी कि केन-बेतवा विस्थापितों का भविष्य किस दिशा में जाएगा। क्या प्रशासन अपने वादों पर खरा उतरेगा या संघर्ष की यह आग और धधकेगी?

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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