बकस्वाहा | बकस्वाहा-सागर मुख्य मार्ग से सटे आमखुआ के जंगलों में इन दिनों कानून को ठेंगे पर रखकर ‘स्कॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर’ का क्रेशर न केवल धरती का सीना छलनी कर रहा है, बल्कि क्षेत्र के भविष्य को भी अंधेरे में धकेल रहा है। ग्रामीणों ने अब इस ‘खूनी विकास’ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तहसीलदार को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें अवैध वृक्ष कटाई, विस्फोटक उपयोग और प्रदूषण के रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए गए हैं।
कुल्हाड़ी की धार और विस्फोटकों की मार
सुनवाहा निवासी राजू सेन और दर्जनों ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर की स्थापना के लिए 10-15 एकड़ के हरे-भरे जंगल को श्मशान बना दिया गया। सागौन के विशाल वृक्षों को काटकर उनके ठूंठों को आग के हवाले कर दिया गया ताकि सबूत मिटाए जा सकें। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि वन, राजस्व और निजी—तीनों प्रकार की जमीनों पर यह अवैध अतिक्रमण फैला हुआ है। रात के सन्नाटे में होने वाले विस्फोटों से न केवल जमीन कांपती है, बल्कि जंगली जानवर गांवों की ओर भागने को मजबूर हैं।
बिना अनुमति, बेरोकटोक ‘लूट’
शिकायत में सीधे आरोप हैं कि कंपनी ने पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण बोर्ड की एनओसी और पंचायत की अनुशंसा जैसे कागजों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है। बिना पानी के छिड़काव के उड़ने वाली धूल किसानों की फसलों पर मौत बनकर जम रही है। प्रतिदिन 40-50 डंपर गिट्टी का अवैध उत्खनन शासन के राजस्व को खुलेआम चूना लगा रहा है।
प्रशासनिक ‘अल्टीमेटम’ और विभाग की चुप्पी
तहसीलदार भरत पांडे ने शिकायत के बाद मौके पर काम रुकवाकर दस्तावेजों की तलब की है। वहीं, वन परिक्षेत्र अधिकारी लव प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि कटाई की कोई अनुमति नहीं ली गई। सवाल यह है कि नाक के नीचे इतना बड़ा खेल चलता रहा और विभाग सोता रहा? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निष्पक्ष जांच और अवैध कटाई पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, वे चुप नहीं बैठेंगे।









