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विधायक राजेश शुक्ला ने बुझाई आंदोलन की आग; बोले— मेरे रहते आदिवासियों का अहित नहीं होगा, मैं खुद लड़ूँगा आपकी लड़ाई

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बिजावर | केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर पिछले छह दिनों से बिजावर की फिजाओं में घुला तनाव अब विधायक राजेश शुक्ला ‘बबलू’ की संवेदनशील पहल से शांति में बदल गया है। गुरुवार को जब ढौंढ़न और पलकौंहा के ग्रामीण अपनी पीड़ा लेकर विधायक निवास पहुँचे, तो संवाद की मेज पर शिकायतों के बादल छंट गए और विश्वास की नई किरण दिखाई दी।

विधायक निवास पर जमा हुए ग्रामीणों ने भरे मन से स्वीकार किया कि वे केवल अपने हक की बात करने आए थे, लेकिन कुछ ‘सियासी सौदागरों’ ने अपनी दुकान चमकाने के लिए उन्हें हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया। ग्रामीणों ने कहा— “हमें उकसाने वाले तो पथराव के बाद अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले, लेकिन पुलिस की कार्रवाई में हमारे मासूम लोग फंस गए। संकट की इस घड़ी में विधायक जी ने न केवल हमारी व्यथा सुनी, बल्कि प्रशासन से बात कर हमारे निर्दोष भाइयों को मुक्त कराया।”

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विधायक बोले दो महीने का समय दें, दिल्ली-भोपाल तक गूँजेगी आपकी आवाज़
विधायक राजेश शुक्ला ने ग्रामीणों को अपने परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि वे पिछले 30 वर्षों से उनके सुख-दुख के साथी रहे हैं। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा: “मैंने कलेक्टर साहब से स्पष्ट कह दिया है कि ये सीधे-साधे आदिवासी हैं, इन्हें बहकाया गया है। इनकी हर जायज मांग पूरी होनी चाहिए। आप अपनी मांगों की सूची दें, मैं स्वयं मुख्यमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से मिलकर आपके पुनर्वसन और मुआवजे का मार्ग प्रशस्त करूँगा। विधायक ने जनता से दो महीने का समय मांगते हुए भरोसा दिलाया कि यदि इस अवधि में समाधान नहीं हुआ, तो वे स्वयं ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठने से पीछे नहीं हटेंगे।

नेताओं की ‘दुकानदारी’ पर प्रहार
विधायक ने कड़े लहजे में उन लोगों को चेताया जो आदिवासियों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे विकास के महायज्ञ में बाधा न डालें और किसी के बहकावे में न आएं। इस भावुक और तर्कपूर्ण संवाद के बाद ग्रामीण संतुष्ट होकर अपने घरों को लौट गए, जिससे यह उम्मीद जागी है कि केन-बेतवा प्रोजेक्ट का कार्य अब निर्बाध रूप से आगे बढ़ेगा।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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