छतरपुर | केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों की चिंता और संघर्ष के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता की एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जन-भावनाओं को सर्वोपरि रखते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास की इस महान गाथा में किसी भी गरीब या पात्र ग्रामीण का अहित नहीं होने दिया जाएगा। विस्थापितों की मांगों पर त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेते हुए कलेक्टर ने न केवल सर्वे दल का गठन किया है, बल्कि प्रशासन के द्वार ग्रामीणों की सहूलियत के लिए पूरी तरह खोल दिए हैं। Click karen क्या बोले कलेक्टर सुने
दस्तावेजों की बाधा होगी दूर, प्रशासन बनेगा ‘सारथी’
अक्सर सरकारी कागजी कार्रवाई में उलझकर ग्रामीण अपने हक से वंचित रह जाते हैं, लेकिन कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने इस दूरी को खत्म कर दिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि- जिन पात्र व्यक्तियों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, प्रशासन स्वयं आगे बढ़कर उनके कागजात बनवाने में मदद करेगा। तहसीलदार सटई की अध्यक्षता में गठित विशेष सर्वे दल 13 गांवों में घर-घर जाकर पारदर्शी ढंग से दोबारा जांच करेगा। यदि कोई भी पात्र हितग्राही पूर्व के सर्वे में छूट गया है, तो उसका नाम तत्काल जोड़कर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
ग्राम सभाओं से ‘संवाद’ और पारदर्शिता का नया अध्याय
कलेक्टर ने केवल आदेश जारी नहीं किए, बल्कि सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए ‘जमीनी संवाद’ का रास्ता चुना है। अब प्रभावित ग्रामों में निरंतर ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि ग्रामीणों को भ्रम से निकाला जा सके। लाभान्वित होने वाले लोगों की सूची सार्वजनिक रूप से गांवों में चस्पा की जाएगी, जिससे व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल का यह रुख दर्शाता है कि वे केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अभिभावक के रूप में ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। डैम निर्माण के कार्यों की समय-समय पर जानकारी देने और विस्थापित परिवारों को शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का उनका आश्वासन, प्रभावित परिवारों के मन में विश्वास की नई किरण जगायेगा।










