Home अजब गजब दोस्तों के घर जमीन पर सोए, दिन में किया 14 घंटे काम,...

दोस्तों के घर जमीन पर सोए, दिन में किया 14 घंटे काम, हर मुश्किल से लड़ खड़ी कर दी ₹1.06 लाख करोड़ की कंपनी

91
0

[ad_1]

Last Updated:

Google search engine

Success Story- आज Gecko Robotics के फाउंडर जेक लूसेरैरियन उन युवा उद्यमियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, जुनून और कभी हार न मानने वाले जज्बे से एक सपना हकीकत में बदला है. शुरूआत में उन्‍हें पग-पग पर…और पढ़ें

जीरो से शुरुआत कर अरबों कमाए,  इस आदमी की कहानी आपको हिला देगी

अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में रहने वाले जेक लूसेरैरियन के लिए अपनी कंपनी को खड़ी करना कतई आसान नहीं रहा.

हाइलाइट्स

  • Gecko Robotics के फाउंडर जेक लूसेरैरियन की प्रेरणादायक कहानी.
  • जेक ने दोस्तों के घर सोकर और 14 घंटे काम कर कंपनी खड़ी की.
  • Gecko Robotics की वैल्यू 1.25 अरब डॉलर तक पहुंची.
नई दिल्ली. मेहनत का फल मिलता है भले ही देर से मिले. हिम्‍मत हारे बिना अपना लक्ष्‍य हासिल करने को जो जी-तोड़ परिश्रम करते हैं, उन्‍हें उनकी मंजिल जरूर मिलती है. इसी को साबित किया है Gecko Robotics के फाउंडर जेक लूसेरैरियन ने. जेक ने जब साल 2013 में ग्रेजुएशन के तुरंत बाद अपने एक कॉलेज प्रोजेक्ट को ही बिजनेस में बदलने का फैसला किया तो सभी ने उन्‍हें ‘ये बेवकूफी’ कभी न करने की ही सलाह दी. लेकिन, जेक को अपने आइडिया और खुद पर भरोसा था. इसी भरोसे की बदौलत आज Gecko Robotics कंपनी की वैल्यू 1.25 अरब डॉलर यानी करीब ₹1.06 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है.

Gecko Robotics रोबोट बनाती है. कंपनी के बनाए AI रोबोट दीवारों पर चढ़ सकते हैं, उड़ सकते हैं और पानी में तैर सकते हैं. ये रोबोट पावर प्लांट, पुल, बांध और सेना के उपकरणों जैसी अहम संरचनाओं की जांच करते हैं. कंपनी की ग्रोथ इतनी तेज रही कि दिसंबर 2023 के बाद से इसकी वैल्यू लगभग दोगुनी हो गई. 12 जून 2024 को हुए फंडिंग राउंड में कंपनी ने 125 मिलियन डॉलर जुटाए गए और कंपनी की वैल्यू 1.25 अरब डॉलर तक पहुंच गई.

आसान नहीं था सफर

अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में रहने वाले जेक लूसेरैरियन के लिए अपनी कंपनी को खड़ी करना कतई आसान नहीं रहा. सबसे पहले तो परिजनों, मित्रों और यहां तक की कॉलेज के उनके अध्‍यापकों ने साल 2013 में उनके बिजनेस आइडिया को ही सिरे से खारिज कर दिया. सबकी बात को अनसुना कर जेक अपने काम में जुट तो गए पर पग-पग पर उन्‍हें परेशानी झेलनी पड़ी. शुरुआत में उनके पास ना पैसे थे, ना दफ्तर, और ना ही टीम.

View this post on Instagram



[ad_2]

Source link

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here