छतरपुर | बुंदेलखंड जैसे पिछड़े माने जाने वाले अंचल से एक ऐसी सुखद और प्रेरक खबर सामने आई है, जिसने प्रदेश के स्वास्थ्य मानचित्र पर छतरपुर का नाम गौरव से अंकित कर दिया है। जिला चिकित्सालय के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए पिछले तीन माह (अक्टूबर से दिसंबर 2025) में ‘शून्य मातृ मृत्यु’ का लक्ष्य प्राप्त किया है। यह सफलता न केवल बेहतर चिकित्सा प्रबंधन का उदाहरण है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के लिए खुशियों की गारंटी बनकर उभरी है।
कलेक्टर की ‘सख्त निगरानी’ और टीम के ‘समर्पण’ का सुफल
इस उपलब्धि के पीछे जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल का प्रभावी नियंत्रण और सतत मॉनिटरिंग एक बड़ा आधार बनी है। कलेक्टर द्वारा समय-समय पर ली गई समीक्षा बैठकें, मैदानी अमले (आशा और एएनएम) की जवाबदेही तय करना और लापरवाही पर सख्त कार्यवाही ने तंत्र को चुस्त-दुरुस्त कर दिया। कलेक्टर की इस प्रशासनिक दृढ़ता को जिला अस्पताल के अनुभवी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल टीम ने अपने कौशल और दिन-रात के परिश्रम से धरातल पर उतारा।
आंकड़ों में सफलता की कहानी:
2927 प्रसव, एक भी अनहोनी नहीं, बीते तीन महीनों में जिला अस्पताल की दक्षता इन आंकड़ों से समझी जा सकती है-
कुल सुरक्षित प्रसव: 2927 (जिसमें 2310 सामान्य और 617 सफल ऑपरेशन शामिल हैं)।, 855 अति-जटिल और 643 अन्य जिलों से रेफर होकर आए गंभीर मरीजों की जान बचाई गई, अस्पताल ने न केवल जिले, बल्कि उत्तर प्रदेश के महोबा सहित खजुराहो, टीकमगढ़ और अजयगढ़ के मरीजों को भी 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं देकर अपना लोहा मनवाया है।
इस शानदार परिणाम से उत्साहित होकर स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य में भी इसी निष्ठा से कार्य करने का संकल्प लिया है। अस्पताल प्रबंधन ने गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे समय पर जांच कराएं और केवल सरकारी संस्थानों में ही प्रसव कराएं, ताकि ‘मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य’ के इस कीर्तिमान को निरंतर बनाए रखा जा सके।










