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Success Story: टीचर की नौकरी छोड़ किया बेकरी का बिजनेस, 50 हजार से हुई शुरुआत, आज वैल्यू 5 करोड़!

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Inspiring Story: टीचर से बिजनेसमैन बने अलीगढ़ के इस शख्स की कहानी किसी के भी दिल में जोश भर सकती है. 50 हजार की पूंजी से शुरू किया गया उनका ये कारोबार आज 5 करोड़ तक पहुंच चुका है.

टीचिंग छोड़ किया बेकरी का काम, 50 हजार से हुई शुरुआत, आज वैल्यू 5 करोड़!

शिक्षक से उद्यमी बने अलीगढ़ के जुगल किशोर

हाइलाइट्स

  • जुगल किशोर ने 50 हजार से बेकरी शुरू की.
  • आज बेकरी का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये है.
  • बेकरी के उत्पाद कई राज्यों में लोकप्रिय हैं.

अलीगढ़. कहते हैं कि अगर कुछ कर गुजरने का जज़्बा दिल में हो तो मंज़िल खुद-ब-खुद आसान हो जाती है. ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है अलीगढ़ के एक शिक्षक की कहानी में. दरअसल, अलीगढ़ के क्वार्सी बायपास स्थित आनंद विहार कॉलोनी के निवासी जुगल किशोर एक स्कूल में शिक्षक थे. वर्ष 1991 में एक दोस्त ने उनके बनाए केक की तारीफ करते हुए कहा कि कभी हमें भी खिलाइए. यह बात उनके मन में घर कर गई. उसी साल बेटे राघवेंद्र सिंह का जन्म हुआ और कुछ समय बाद उन्होंने 50 हज़ार की पूंजी से घर में ही ‘कृष्णा बिस्कुट बेकरी’ की शुरुआत की.

कठिनाइयों भरा सफर
जुगल किशोर ने बताया कि शुरुआत में यह सफर आसान नहीं था. एक ओर स्कूल की नौकरी और दूसरी ओर बेकरी का काम, दोनों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण था. लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने इन दोनों ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभाया. परिवार के कुछ सदस्यों ने भी सहयोग किया. धीरे-धीरे बेकरी की पहचान बनने लगी और अलीगढ़ के अलावा आसपास के जिलों जैसे हाथरस, बुलंदशहर, मैनपुरी, फिरोजाबाद और बरेली तक उनके उत्पाद पहुंचने लगे.

बेटे ने दी कारोबार को नई समझ
उन्होंने कहा कि बेटे राघवेंद्र सिंह ने 2013 में डीएस कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की और फिर पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ने का निर्णय लिया. उनकी आधुनिक सोच और व्यापारिक समझ ने कारोबार को नई दिशा दी। वर्ष 2019 में अलीगढ़ की तालानगरी में ‘रिद्धिमा फूड्स’ के नाम से एक फैक्टरी स्थापित की गई.

दूसरे राज्यों तक पहुंच
उन्होंने कहा कि इस नई शुरुआत से कारोबार में और विस्तार हुआ और अब उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, एनसीआर और उत्तराखंड तक इनकी पहुंच बन चुकी है. बेकरी के उत्पाद जैसे बिस्कुट, रस्क, बन, ब्रेड, केक और फ्रूट केक अब कई राज्यों में लोकप्रिय हो चुके हैं. जुगल किशोर की यह यात्रा केवल एक व्यवसाय की नहीं, बल्कि जुनून, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है.

एक शिक्षक से सफल उद्यमी तक का उनका सफर आज कई युवाओं को प्रेरणा देता है. वर्तमान में उनकी बेकरी का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो उनकी मेहनत और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है. शुरुआत से लेकर आज तक उनके प्रोडक्ट खूब पसंद किए जा रहे हैं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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