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Special importance of planting trees on Hariyali Amavasya | हरियाली अमावस्या पर पौधराेपण का खास महत्व: सर्वार्थ सिद्धि योग में लगाएं पौधे, पितरों की कृपा पाने का अवसर – Ujjain News

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हरियाली अमावस्या पर ये पाैधे लगाएं जा सकते है।

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श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या 24 जुलाई गुरुवार को है। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र और वज्र योग के साथ कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति रहेगी। पुनर्वसु नक्षत्र की वजह से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।

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पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार, यह दर्श अमावस्या की श्रेणी में आती है। अमावस्या तीन प्रकार की होती है,

  • कूहु अमावस्या
  • सीनि वाली अमावस्या
  • दर्श अमावस्या

दर्श अमावस्या का प्रभाव सबसे अधिक

इस दिन धार्मिक अनुष्ठान, पौधरोपण, पितरों के लिए दान, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। पितरों की प्रसन्नता के लिए पीपल, नीम, बरगद, शमी, अशोक, गूलर और आंवला के पौधे लगाए जा सकते हैं। इन पौधों की नियमित देखभाल से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

जन्म कुंडली के अनुसार भी पौधारोपण किया जा सकता है। सूर्य के लिए आंकड़ा, चंद्र के लिए खेर, मंगल के लिए लाल कनेर या रक्त चंदन, बुध के लिए अपामार्ग, गुरु के लिए पीपल, शुक्र के लिए गुलर, शनि के लिए शमी और राहु-केतु के लिए पवित्री का पौधा शुभ माना जाता है। पवित्री के बारे में कहा जाता है कि यह स्वयं उगती है।

पर्यावरण से जुड़ा हरियाली अमावस्या का त्योहार

हरियाली अमावस्या का त्योहार पर्यावरण से जुड़ा होता है। यह त्योहार प्रकृति की अलग-अलग रूप में पूजा, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प एवं प्रकृति को कुछ देने का होता है। इसीलिए इस दिन घर, मंदिर, नदी के तट, तीर्थस्थल, धर्मशाला आदि स्थानों पर पेड़ लगाने तथा पौधों का दान करने से पुण्य फल मिलता है। कहा जाता है कि जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता, वैसे ही दानकर्ता को शुभ फल मिलता है।

कहा जाता है कि जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता, वैसे ही दानकर्ता को शुभ फल मिलता है। (फाइल)

कहा जाता है कि जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता, वैसे ही दानकर्ता को शुभ फल मिलता है। (फाइल)

जानिए, किस पौधे को लगाने से क्या मिलता है फल

  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए : तुलसी, आंवला, केला, बेल का वृक्ष।
  • आरोग्य के लिए : ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आंवला, सूरजमुखी, तुलसी।
  • ऐश्वर्य व सौभाग्य के लिए : अशोक, अर्जुन, नारियल और वट वृक्ष।
  • संतान प्राप्ति के लिए : पीपल, नीम, बेल, नागकेशर, अश्वगंधा।
  • मेधा के लिए : शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी और तुलसी।
  • सुख प्राप्ति : नीम, कदंब, छायादार वृक्ष।
  • आनन्द प्राप्ति : हरसिंगार, रातरानी, मोगरा, गुलाब।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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