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जबलपुर उच्च न्यायालय ने सरदार सरोवर बांध प्रभावितों के पुनर्वास मामले में राज्य सरकार और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण से प्रभावितों को आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री में देरी का कारण पूछा है।
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न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायाधीश गजेंद्रसिंह की खंडपीठ नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर की जनहित याचिका पर विचार कर रही है। याचिका में पुनर्वास स्थलों पर विस्थापितों को दी गई जमीन और मकानों की मुफ्त रजिस्ट्री की मांग की गई है।

मेधा पाटकर की याचिका पर हो रही सुनवाई।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के सदस्य राहुल यादव ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि याचिका में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। सितंबर 2023 में बैकवाटर से प्रभावित गांवों का सर्वेक्षण और मुआवजे की मांग की गई है। पुनर्वास स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की मांग भी की गई है। जिन प्रभावितों ने अपने भूखंड बेच दिए हैं, उनके मामलों को प्राकृतिक न्याय के आधार पर निपटाने की मांग शामिल है।
याचिका में अगले 6 महीनों के लिए एक समयबद्ध पुनर्वास योजना की मांग की गई है। साथ ही कोर्ट में मासिक प्रगति रिपोर्ट जमा करने का प्रस्ताव रखा गया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2025 को निर्धारित की गई है। मेधा पाटकर स्वयं इस मामले की पैरवी कर रही हैं।
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