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जब दोनों किडनी काम करना बंद कर देती है तो शरीर से वेस्ट नहीं निकलता है। ऐसे में पानी का भी डायलिसिस भी होता है। इसे मेडिकल में पेरिटोनियल डायलिसिस कहते हैं। इसमें पेट के अंदर एक खास तरह का पानी डाला जाता है। इसकी मदद से शरीर के टॉक्सिक तत्व और एक्स्ट्रा पानी बाहर निकाला जाता है। इससे मरीज जल्द ठीक हो जाता है। यह बात डॉ. सुमंत्रा (दार्जिलिंग) ने पीडियाट्रिक्स नेफ्रोलॉजी की कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने बताया कि इस डायलिसिस की प्रक्रिया के लिए बड़ी मशीन और सुविधाएं आवश्यक नहीं होती है। इसे आसानी से किया जा सकता है। हिमो-डायलिसिस की प्रक्रिया बड़ों के लिए बेहतर होती है। कम उम्र के बच्चों के लिए यह प्रक्रिया जटिल होती है। बच्चों के केस पेरिटोनियल डायलिसिस बेहतर विकल्प होता है। इसके लिए ज्यादा सेटअप और जटिल ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती है। गांवों के अस्पतालों में भी इसे आसानी से कम खर्च में किया जा सकता है। हम डॉक्टर्स को इसके लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में भी डमी बॉडी पर इसकी ट्रेनिंग दी गई।

कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए देशभर के पीडियाट्रिशियन।
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. शिल्पा सक्सेना ने बच्चों की
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