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घटना के बाद 19 सितंबर को हिंदूवादी संगठनों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया था।
भोपाल के जिस प्राइवेट स्कूल की 3 साल की बच्ची से रेप हुआ था, उसकी अगले शिक्षा सत्र से मान्यता रिन्यू नहीं होगी। वहीं, कुल 324 बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल फिर से खोला जाएगा। जिसकी कमान शिक्षा विभाग खुद अपने हाथों में लेगा। 6 सदस्यीय जांच कमेटी
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सितंबर में यह मामला सामने आने के बाद काफी हंगामा भी हुआ था। आरोपी इसी स्कूल का टीचर था। हंगामा बढ़ते देख जिला प्रशासन ने स्कूल को सील कर दिया था। वहीं, दो जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं। पहली जांच रिपोर्ट में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। वहीं, दूसरी 7 सदस्यीय कमेटी ने स्कूल के संचालन को लेकर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को दी।
दो विकल्प पर मंथन, स्कूल को कंटीन्यू रखने का फैसला स्कूल के संचालन को लेकर दो विकल्प पर मंथन किया गया। ताकि बच्चे अपने पढ़ाई कंटीन्यू रख सकें। पहला विकल्प- स्कूल की मान्यता रद्द कर दें और बच्चों का दूसरे स्कूल में दाखिला करवा दें। दूसरा विकल्प- मान्यता रद्द नहीं करते हुए इस सत्र के लिए स्कूल की कमान खुद अपने हाथों में ले लें।
इस टीम में अफसर, शिक्षाविद शामिल थे। स्कूल की मान्यता को लेकर टीम ने मंथन किया। आखिरकार टीम इस नतीजे पर पहुंची कि अभी स्कूल को खोल दिया जाए, लेकिन अगले शिक्षण सत्र से मान्यता रिन्यू न हो। कलेक्टर सिंह ने बताया, जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
इसमें मौजूदा शिक्षा सत्र में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की बात कही गई है। संकुल प्राचार्य या सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपेंगे। अगले सत्र से स्कूल की मान्यता रिन्यू नहीं करने दी जाएगी।

मासूम से रेप करने का आरोपी कासिम रेहान।
79 बच्चे का दाखिला आरटीई से स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 79 ऐसे हैं, जिनका आरटीई (राइट टू एजुकेशन) में एडमिशन हुआ है। बीच सत्र में स्कूल बंद होने से सभी बच्चों को परेशानी हो सकती थी। उनका एक साल बिगड़ जाएगा।
इसलिए ऐसा करने का प्लान स्कूल खुले पांच महीने हो चुके हैं। यानी, आधा शिक्षा सत्र। ऐसे में बच्चों का कहीं एडमिशन भी नहीं हो सकता। स्कूल को बंद रखते हैं तो बच्चों का एक साल खराब हो जाएगा। दूसरी तरफ, कई शिक्षकों का पढ़ाई का तरीका बच्चों को बेहतर लगता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसलिए जांच टीम ने प्लान तैयार किया। यही कलेक्टर को सौंपा गया।
हिंदू संगठनों ने किया था प्रदर्शन
यह प्राइवेट स्कूल भोपाल के कमला नगर इलाके में है। मामला सामने आने के दूसरे दिन 19 सितंबर को हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया था। इस बीच स्कूल को सील कर दिया गया था। प्रदर्शन करने वालों में एबीवीपी, करणी सेना, संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ता, नूतन कॉलेज समेत कुछ प्राइवेट कॉलेज के स्टूडेंट्स शामिल हुए थे।
उनकी मांग थी कि स्कूल की मान्यता रद हो। आरोपी टीचर कासिम रेहान (33) को फांसी की सजा दी जाए। इस घटना के बाद आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। कमला नगर थाना पुलिस ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए आरोपी को कोर्ट में पेश किया। बाद में उसे जेल भेज दिया गया था।
घटना के बाद बड़ा फैसला…सभी का वेरिफिकेशन
इस घटना के बाद पुलिस और जिला प्रशासन एक्शन में आया। जिला शिक्षा केंद्र ने सभी प्राइवेट स्कूलों के प्राचार्यों को लेटर लिखा गया कि उनके यहां सभी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ का चारित्रिक व पुलिस वेरिफिकेशन करवाएं। भोपाल में नर्सरी, प्राइमरी, मीडिया, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 1560 है। वहीं, 433 मदरसे हैं। एक स्कूल या मदरसे में औसत 20 कर्मचारियों का स्टाफ के हिसाब से मानें, तो करीब 40 हजार लोगों का स्टाफ है। इनका वेरिफिकेशन करवाया गया।
डीपीसी ओपी शर्मा ने बताया कि अधिकांश स्कूलों का वेरिफिकेशन हो गया है। स्कूल संचालक या प्रिंसिपल से कहा गया था कि वे स्टाफ की जानकारी दें। उन पर आपराधिक मामला तो नहीं? पुलिस वेरिफिकेशन करवाएं और फिर रिपोर्ट ऑफिस में दें।
इनका वेरिफिकेशन कराया विषय विशेषज्ञ शिक्षक, खेल शिक्षक, केयर टेकर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, गार्ड, सफाईकर्मी, माली, बस ड्राइवर, कंडक्टर, बिजलीकर्मी, क्लीनर।
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7 सदस्यीय टीम मंथन में जुटी; मान्यता रद्द नहीं तो क्या करेगा प्रशासन? भोपाल के प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली 3 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपी उसी स्कूल का टीचर। 6 दिन में 2 प्रदर्शन हुए। दो जांचें भी हुईं। इनमें से एक में स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई। दूसरी जांच में स्कूल में पढ़ने वाले 324 बच्चों के भविष्य की चिंता और मान्यता को लेकर मंथन चल रहा है। फिलहाल स्कूल सील है। 7 सदस्यीय टीम यह तय करने में जुटी है कि इन 324 बच्चों के भविष्य का क्या होगा? पढ़े पूरी खबर

टीटी नगर एसडीएम डॉ. अर्चना रावत शर्मा ने दोनों जांच की। इसके बाद कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
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