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सरसेड़ और कैंथोकर पंचायतों के सरपंच-सचिव से होगी लाखों की वसूली: जारी हुआ 6.22 लाख की वसूली का नोटिस; योजनाओं में हुआ भारी भ्रष्टाचार

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हरपालपुर। नौगांव जनपद की ग्राम पंचायत सरसेड़ और कैंथोकर में जल गंगा अभियान और मनरेगा योजना के तहत फर्जी बिलों के भुगतान का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरसेड़ के सरपंच और सचिव से 4,89,980 रुपये और कैंथोकर के सरपंच और सचिव से 1,32,618 रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों हुई उक्त मामलों की जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद जिला प्रशासन ने वसूली का नोटिस जारी किया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मई 2025 में ग्राम पंचायत सरसेड में जल गंगा अभियान के तहत खेत तालाबों के निर्माण में मशीनों से काम कराए जाने की शिकायत सामने आने के बाद कलेक्टर पार्थ जैसवाल और जिला पंचायत सीईओ तपस्या सिंह परिहार ने जांच कमेटी गठित की थी, जिसमें चंद्रकृपाल अहिरवार (प्रभारी खंड पंचायत अधिकारी) और सुजीत कुमार वर्मा (पंचायत समन्वय अधिकारी) शामिल थे। 30 जुलाई 2025 को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सरसेड़ में सामुदायिक और हितग्राही खेत तालाबों का स्थल निरीक्षण पानी के भराव और रास्ते की कमी के कारण नहीं हो सका। जांच में पाया गया कि सरपंच कल्लू प्रजापति और तत्कालीन सचिव उदय सिंह गौर ने सीसी रोड, सार्वजनिक कूप, नाली निर्माण, रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्यों में बालू, रेत, मुरम, गिट्टी और बोल्डर के फर्जी बिलों के जरिए 4,89,980 रुपये का भुगतान किया। यह भुगतान जय मां दुर्गा ट्रेडर्स, नौगांव को किया गया, जो केवल सीमेंट और सरिया का काम करता है, न कि अन्य सामग्री का। यह वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। मध्य प्रदेश पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 और 92 के तहत प्रकरण दर्ज कर इस राशि की वसूली सरपंच और सचिव से की जाएगी।
इसी तरह, मई 2025 में ही ग्राम पंचायत कैंथोकर में मनरेगा योजना के तहत गेबियन स्ट्रक्चर कार्य में फर्जी बिलों के भुगतान की शिकायत सामने आई थी। इस मामले की जांच हेतु गठित की गई टीम द्वारा 30 जुलाई को दी गरिपोर्ट में पाया गया कि सरपंच श्रीमती रागनी कौशिक और तत्कालीन सचिव अरविंद नायक ने जय मां दुर्गा ट्रेडर्स को गिट्टी, रेत, बोल्डर पत्थर और सूचना बोर्ड परिवहन जैसी सामग्री के लिए 1,32,618 रुपये का भुगतान किया, जबकि यह वेंडर केवल सीमेंट, सरिया और सेटरिंग का काम करता है। यह भी वित्तीय नियमों के खिलाफ है। अधिनियम की धारा 89 और 92 के तहत प्रकरण दर्ज कर इस राशि की वसूली सरपंच और सचिव से की जाएगी। जांच में यह भी सामने आया कि कैंथोकर में लाखों रुपये की लागत से बना गेबियन स्ट्रक्चर तीन महीने में ही ध्वस्त हो गया। ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच और मरम्मत की मांग की थी। प्रशासन ने सात दिन में मरम्मत के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक यह कार्य नहीं हुआ। ग्रामीणों की शिकायतों और मीडिया की सक्रियता के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया, पर गेबियन स्ट्रक्चर की बदहाली जस की तस बनी हुई है।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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