छतरपुर/राजनगर: आरोप हैं कि राजनगर थाने में पुलिस की प्रताड़ना और बर्बरता से आहत होकर राजेश पटेल ने मौत को गले लगा लिया, इस मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन अफसोस! जहां इस दुख की घड़ी में पुलिस को मरहम लगाना चाहिए था, वहां खजुराहो SDOP मनमोहन बघेल का असंवेदनशील और तानाशाही चेहरा सामने आया है।
देखें वीडियो क्या कहा SDOP ने CLICK VIDEO…
रक्षक ही जब भक्षक की भाषा बोले…
घटनास्थल पर पहुंचे राजनगर के कद्दावर नेता घासीराम पटेल के पुत्र कमलेश पटेल ने बताया कि जब पीड़ित परिवार को शांतिपूर्ण तरीके से न्याय दिलाने की बात कर रहे थे, तब सहानुभूति दिखाने के बजाय पुलिस अधिकारी धमकी पर उतर आए। SDOP ने खुलेआम धमकी देते हुए कहा— “इनकी वीडियोग्राफी करो, इन्हें तो हम बाद में देख लेंगे।”
SP अगम जैन से क्यों नहीं सीखते मातहत?
यह छतरपुर पुलिस का दुर्भाग्य है कि जिले के कप्तान SP अगम जैन जहां मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल दोषियों पर गाज गिरा रहे हैं और न्याय का भरोसा दे रहे हैं, वहीं उनके अधीन काम करने वाले अधिकारी ‘वर्दी के नशे’ में चूर हैं और नाजुक मौके की नजाकत को भी नहीं समझते।
एक तरफ SP अगम जैन की त्वरित कार्रवाई (दो आरक्षकों का निलंबन) है, वहीं दूसरी तरफ SDOP का यह डराने वाला रवैया, क्या किसी पीड़ित के पक्ष में खड़े होना अब अपराध है जिसकी वीडियोग्राफी कर ‘देख लेने’ की धमकी दी जा रही है?
निंदणीय और शर्मनाक!
थाने के भीतर हुई मौत ने पहले ही कानून की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया था, उस पर पुलिसिया ‘धौंस’ ने आग में घी का काम किया है। अपनों को खोने वाले परिवार को सांत्वना देने के बदले जेल भेजने का डर दिखाना अमानवीयता का नया अध्याय है। जनता का सीधा सवाल है— क्या वर्दी का रसूख अब सच की आवाज दबाने का लाइसेंस बन गया है?
निश्चित ही खजुराहो SDOP का यह रवैया उनकी पद की गरिमा के खिलाफ है। आखिर क्यों जिले के कप्तान की नेकनीयती पर उनके ही मातहत अधिकारी पानी फेर रहे हैं। आखिर “देख लेने की धमकी किसे दे रहे हैं साहब? जनता देख रही है आपकी …शाही!”
राजनगर थाने में ‘कस्टोडियल डेथ’ से दहला छतरपुर, न्याय की मांग पर घंटों चक्काजाम, पुलिस ने ऐसे मनाया
बुंदेलखंड के राजनगर थाने से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। जहाँ जनता की सुरक्षा का दम भरने वाली पुलिस की कस्टडी में एक ‘घर का चिराग’ बुझ गया। ग्राम इमलिया निवासी राजेश पटेल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल पुलिसिया तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि वर्दी पर ‘भ्रष्टाचार और प्रताड़ना’ के गंभीर आरोप भी मढ़े हैं।
शौचालय में ‘फांसी’ या सिस्टम की ढिलाई?
जानकारी के मुताबिक, राजेश को धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर थाने लाया गया था। पुलिस का दावा है कि उसने शौचालय के बहाने जाकर अंदर फांसी लगा ली। लेकिन सवाल यह है कि पुलिस की कड़ी निगरानी के बीच एक आरोपी के पास खुदकुशी का सामान कहाँ से आया? परिजनों का आरोप इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला है— उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने राजेश को छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। मांग पूरी न होने और प्रताड़ना के चलते यह दुखद अंत हुआ।
गाज गिरी, पर क्या इंसाफ मिलेगा?
मामले की गंभीरता को देखते हुए SP अगम जैन ने रात्रि में ही आरक्षक शिवकुमार और संजय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था. थाना राजनगर अंतर्गत हुई घटना के संबंध में माननीय न्यायाधीश द्वारा स्थल पर पहुंचकर न्यायिक जांच की जा रही है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु घटनास्थल की कार्यवाही वीडियोग्राफी के साथ कराई जा रही है। पोस्टमार्टम पैनल के द्वारा वीडियोग्राफी के माध्यम करवाई जाएगी।
प्रथम दृष्टया प्राथमिक जांच में राजनगर थाना प्रभारी दीपक शर्मा, आरक्षक संजय कुमावत और शिवकुमार पाल को सस्पेंड कर दिया है। प्रकरण में नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
अगम जैन
पुलिस अधीक्षक छतरपुर
SP अगम जैन क्या बोले सुनें…… Click VIDEO
सड़क पर संग्राम: जब थमीं रफ्तारें
घटना के दूसरे दिन आक्रोश का सैलाब सड़कों पर उतर आया। परिजनों और ग्रामीणों ने राजनगर में 4 घंटे तक चक्काजाम रखा। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई, माहौल तनावपूर्ण बना रहा। आखिरकार, जब प्रशासन ने न्यायिक (मजिस्ट्रेट) जांच का लिखित आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर जाम खुला। लेकिन पोस्टमार्टम के बाद फिर परिजन और ग्रामीण हंगाम करने लगे तब asp आदित्य पटले ने मोर्चा संभाला और परिजनों और आक्रोशित जनसमूह को समझाया एवं मृतक राजेश पटेल के पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंपकर गाँव रवाना किया।
मृतक राजेश पटेल का शव उसके गांव के लिए रवाना.. काफी मशक्कत के बाद माने परिजन,










