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छतरपुर के पूर्व कलेक्टर, शिवराज के विश्वस्त रहे रिटायर्ड IAS का ‘मुख्यमंत्री सचिवालय’ में कमबैक: अजातशत्रु श्रीवास्तव के ओएसडी बनने के पीछे की इनसाइड खबर…

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मध्य प्रदेश की सत्ता के गलियारों में इस वक्त एक ही नाम की गूँज है— अजातशत्रु श्रीवास्तव। राज्य की प्रशासनिक बिसात पर एक ऐसा मोहरा चला गया है, जिसने राजनैतिक पंडितों और नौकरशाहों को हैरान कर दिया है। छतरपुर जिले के पूर्व कलेक्टर अजातशत्रु श्रीवास्तव की तैनाती महेश चंद चौधरी को पद से हटाए जाने के बाद की गई है. सरकार के आदेश के अनुसार अजातशत्रु श्रीवास्तव तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे ‘खास’ और संकटमोचक रहे 1985 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अजातशत्रु श्रीवास्तव ने अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘सारथी’ के रूप में नई पारी शुरू कर दी है।

शिवराज के ‘चाणक्य’ अब मोहन के ‘ओएसडी’

इसे महज एक नियुक्ति कहना गलत होगा, यह प्रशासनिक गलियारों में ‘पावर बैलेंस’ का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। अजातशत्रु श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री का ओएसडी बनाने के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में तैनात किया गया है। बुधवार को जब उन्होंने पदभार ग्रहण किया, तो मंत्रालय की सीढ़ियों पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि आखिर “शिवराज के करीबी रहे अधिकारी पर मोहन यादव इतने मेहरबान क्यों हुए?”

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इनसाइड स्टोरी: क्यों पड़ी अजातशत्रु की जरूरत?

राजनीति में कहा जाता है कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। अजातशत्रु श्रीवास्तव उस दौर के अधिकारी हैं जब नीतियां कागजों पर नहीं, धरातल पर बनती थीं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे पेचीदा विभागों में उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग रहा है।

  1. डॉ. मोहन यादव अपनी टीम में ऐसे चेहरों को जगह दे रहे हैं जो ‘सिस्टम’ की नस-नस से वाकिफ हों। अजातशत्रु उस ब्रिज (पुल) की तरह हैं जो पिछली सरकार के अनुभवों और वर्तमान सरकार के नए विजन को आपस में जोड़ेंगे।
  2. सुशासन संस्थान सरकार का वह दिमाग है जहाँ नीतियां पकती हैं। अजातशत्रु को वहां सलाहकार बनाकर मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि वे ‘सुशासन’ के मामले में कोई समझौता नहीं चाहते।
  3. अजातशत्रु की सबसे बड़ी खूबी उनकी ‘लो-प्रोफाइल’ रहकर बड़े काम करने की शैली है। वे विवादों से दूर रहते हैं और नतीजों पर ध्यान देते हैं—यही खूबी मोहन यादव को भाई है।

मंत्रालय में चर्चा है कि यह नियुक्ति मोहन यादव सरकार की परिपक्वता का संकेत है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि उनके लिए ‘व्यक्ति’ नहीं, बल्कि ‘योग्यता’ मायने रखती है। हालांकि, विरोधी खेमे में इसे लेकर चटखारे लिए जा रहे हैं कि क्या मोहन यादव को भी अंततः पुराने वफादारों की ही शरण लेनी पड़ रही है?

नई पारी, नई चुनौतियां

अजातशत्रु के कंधों पर अब दोहरी जिम्मेदारी है। एक तरफ उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठकर प्रशासनिक कड़ियाँ जोड़नी हैं, तो दूसरी तरफ सुशासन संस्थान के जरिए एमपी को ‘मॉडल स्टेट’ बनाने का खाका तैयार करना है। पदभार संभालते ही उन्होंने कहा, “यह सेवा का अवसर है, जिसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।” अब देखना यह होगा कि ‘अजातशत्रु’ (जिसका कोई शत्रु न हो) अपनी इस नई भूमिका में कितने सफल होते हैं और क्या वे मोहन यादव की टीम में भी वही ‘जादू’ दिखा पाएंगे, जिसके लिए वे शिवराज काल में जाने जाते थे।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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