नौगांव। नगर स्थित बुंदेलखंड गौशाला में हाल के दिनों में भूख एवं ठंड के कारण गोवंशों की मौत के गंभीर मामले के बाद जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
शनिवार को नौगांव के एसडीएम गोपाल शरण पटेल एवं तहसीलदार रमेश कॉल ने गौशाला का पुन: निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गौशाला की लगभग 86 एकड़ भूमि में से बड़े हिस्से पर संचालक द्वारा खेती एवं वृक्षारोपण किया गया है, जबकि गौशाला में निवासरत गोवंशों के लिए पर्याप्त चारे एवं ठंड से सुरक्षा की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई थी।
एसडीएम गोपाल शरण पटेल ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में 700 से 800 गोवंश मौजूद हैं। उनके ठहरने हेतु स्थान उपलब्ध है, किंतु भोजन एवं शीतकालीन सुरक्षा की व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। इसी लापरवाही के फलस्वरूप हाल ही में दो दर्जन से अधिक गोवंशों की मृत्यु हो चुकी है।
प्रारंभिक जानकारी में गौशाला प्रबंधन ने मृत्यु का कारण ठंड बताया था, परंतु पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि मृत गोवंशों के पेट खाली थे तथा मुख्य मृत्युकारण भूख एवं शारीरिक कमजोरी था। निरीक्षण के समय एसडीएम द्वारा उन भूमि खंडों पर गोवंशों को छोडऩे की व्यवस्था की गई, जिन्हें संचालक ने पूर्व में उपयोग से बाहर रखा हुआ था। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम गोपाल शरण पटेल ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि अब गौशाला परिसर में हरी घास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, चारा उत्पादन स्वयं गौशाला में ही कराया जाएगा तथा गोवंशों को ठंड से बचाव हेतु समुचित प्रबंध किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि गौशाला संचालक द्वारा कुछ निर्माण कार्य तो कराए गए हैं, किंतु गोवंश संरक्षण एवं उनकी उचित देखभाल की मूल जिम्मेदारी का पालन नहीं किया गया। मामला जिला एवं प्रदेश स्तर तक पहुंचने के पश्चात जिला प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए व्यवस्थाओं को सुधारने की ठोस पहल आरंभ कर दी है।









