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यूनिवर्सिटी या समस्याओं का ‘अड्डा’? MCBU में अभाविप का हल्लाबोल, बदहाल व्यवस्थाओं पर प्रशासन को घेरा

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छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (MCBU) की चमचमाती बिल्डिंग के पीछे छिपे अव्यवस्थाओं के ‘अंधेरे’ के खिलाफ आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बिगुल फूंक दिया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद उड़ाते हुए परिसर में व्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर जोरदार प्रदर्शन किया और साफ लहजे में चेतावनी दी कि ‘डिग्री बांटने के साथ-साथ सुविधाएं देना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है’।
“छात्राओं की सुरक्षा और छात्रों की सुविधा से समझौता नहीं”
विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष देवांशी द्विवेदी के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने परिसर में नारेबाजी करते हुए कुलपति और कुलसचिव कार्यालय के समक्ष अपनी मांगों की झड़ी लगा दी। देवांशी द्विवेदी ने कड़े शब्दों में कहा, “विश्वविद्यालय में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं है, परिसर आवारा मवेशियों का चारागाह बन चुका है और बाहरी असामाजिक तत्वों का जमावड़ा छात्राओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।”
पढ़ाई से लेकर सुरक्षा तक… समस्याओं की लंबी फेहरिस्त
छात्रों ने अपनी मांगों में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली की बखिया उधेड़कर रख दी। मुख्य मांगे निम्नलिखित रहीं-
पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और बाहरी तत्वों के प्रवेश पर रोक लगे।
कक्षाओं की नियमित सफाई हो और छात्राओं के बाथरूम में ‘सेनेटरी पैड’ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कंप्यूटर लैब को क्रियाशील बनाया जाए और एमपीपीएससी (MPPSC) कोचिंग सेंटर शुरू किया जाए।
सुरक्षा गार्डों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य हो और आवारा मवेशियों को परिसर से बाहर किया जाए।
पुस्तकालय में करेंट अफेयर्स की पत्रिकाएं उपलब्ध हों और एनएसएस (NSS)/एनसीसी (NCC) में प्राध्यापकों की कमी दूर की जाए।
कुलसचिव का आश्वासन कागजों पर या जमीन पर?
भारी विरोध प्रदर्शन के बीच कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल छात्र प्रतिनिधियों से मिलने पहुँचे। उन्होंने सभी मांगों को जायज बताते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे; अगर जल्द ही जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा, तो अभाविप विश्वविद्यालय की ईंट से ईंट बजा देगी।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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