छतरपुर | छतरपुर जिले के मऊसहानियां स्थित बुंदेलखंड गौशाला में मचे बवाल और गोवंश की मौत के गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने हिंदू समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को संज्ञान में लेते हुए एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच दल का गठन कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गौ-सेवा के नाम पर भ्रष्टाचार और पशुओं के साथ क्रूरता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तीन दिन में खुलेगी ‘घोटाले’ की फाइल
कलेक्टर ने जांच दल को मात्र तीन दिन का समय दिया है। इस दल में एसडीएम नौगांव, कृषि विभाग के उप संचालक, पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी, जिला कोषालय अधिकारी और जनपद सीईओ नौगांव जैसे अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह दल गौशाला की हर परत को खंगालेगा।
84 एकड़ भूमि का रहस्य: आरोप है कि गौशाला की विशाल भूमि का उपयोग गोवंश के चारे के बजाय व्यापारिक अनाज उगाने और उसे बाजार में बेचने के लिए किया जा रहा था।
ज्ञापन में सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि प्रबंधक द्वारा जहर देकर 70-80 जंगली जीवों और 24-25 गोवंश को मौत के घाट उतारा गया है। दल इन मौतों के असली कारणों की बारीकी से जांच करेगा।
सरकारी खजाने से गौशाला को मिले बजट का उपयोग वास्तव में गायों पर हुआ या जिम्मेदारों की जेब में गया, इसका हिसाब जिला कोषालय अधिकारी करेंगे।
“गौवंश भूख से मरा और अनाज बाजार में बिका”
सर्व हिंदू समाज का आरोप है कि गौशाला समिति के अध्यक्ष संजू पाठक और उनके साथियों ने सेवा के इस पवित्र मंदिर को व्यापारिक केंद्र बना दिया। जहाँ एक ओर गौमाता भूख से तड़पकर दम तोड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर गौशाला की जमीन पर लहलहाती फसल को बेचकर मुनाफ़ा कमाया जा रहा था।










