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बेटियों की विदाई से महका शशिकांत का रिसेप्शन: विरासत में मिले संस्कार, दिल से निकली दुआएं, 14 निर्धन कन्याओं के भाई बने शशिकांत

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छतरपुर। बुंदेलखंड के हृदय स्थल छतरपुर में आज एक ऐसा रिसेप्शन, (14 निर्धन कन्याओं की शादी संपन्न हुई,) जिसने समाज के सामने ‘रसूख’ और ‘जिम्मेदारी’ की नई परिभाषा लिख दी है। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विद्या हरिओम अग्निहोत्री के पुत्र, युवा नेता शशिकांत अग्निहोत्री ने अपने विवाह की खुशियों को व्यक्तिगत दायरे से बाहर निकालकर मानवता के आँगन में बिखेर दिया।


​अपने रिसेप्शन के गौरवमयी अवसर पर शशिकांत ने 14 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह कराकर यह साबित कर दिया कि संस्कार विरासत में मिलते हैं, और सेवा का संकल्प हृदय से आता है।

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​प्रशासनिक अमले ने दिया आशीर्वाद: SP और कलेक्टर बने गवाह
​इस भावुक और सराहनीय आयोजन की गरिमा तब और बढ़ गई जब जिले के कप्तान SP अगम जैन और कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने समारोह में शिरकत की। जिले के इन दो शीर्ष अधिकारियों ने न केवल नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया, बल्कि शशिकांत अग्निहोत्री की इस ‘नेक पहल’ की मुक्त कंठ से सराहना की। अधिकारियों का यह आगमन इस बात का प्रतीक था कि जब युवा शक्ति समाज कल्याण के लिए उठती है, तो पूरा तंत्र उनके साथ खड़ा होता है।


​वृंदावन की गूँज और मयूर नृत्य का उल्लास
​समारोह का वातावरण तब आध्यात्मिक हो उठा जब वृंदावन के प्रसिद्ध मयूर गायन की प्रस्तुतियाँ शुरू हुईं। वैदिक मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक छटा के बीच ऐसा लग रहा था मानो साक्षात देवलोक छतरपुर की धरती पर उतर आया हो। बफर सिस्टम, डीजे और घोड़ों पर सवार दूल्हों की रौनक ने इस ‘सामूहिक विवाह’ को किसी राजसी शादी से कम नहीं होने दिया।


​दहेज नहीं, ‘दुआओं’ का उपहार
​शशिकांत अग्निहोत्री ने इन 14 बेटियों को केवल विदा नहीं किया, बल्कि उनके नए घर की नींव भी मजबूत की। उपहार स्वरूप फ्रिज, कूलर, बेड और बर्तन जैसी गृहस्थी की तमाम आवश्यक सामग्री भेंट की गई। यह दान नहीं, बल्कि एक भाई का अपनी बहनों के प्रति वह कर्तव्य था, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति की आँखों को नम और मन को गर्व से भर दिया।



​जहाँ आज के दौर में रसूखदार परिवार अपनी शादियों में करोड़ों की फिजूलखर्ची कर ‘रुतबा’ दिखाते हैं, वहीं अग्निहोत्री परिवार ने 14 परिवारों के आँगन में खुशियों के दीये जलाकर यह संदेश दिया है कि “असली रुतबा पद से नहीं, परोपकार से मिलता है।”

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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