विनोद कुमार जैन | बकस्वाहा
छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम सानोदा, लहरपुरा और गेवलारी के ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित पक्की सड़क की माँग को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
डगरई तिगड्डा से लेकर ग्राम लहरपुरा तक कुल 7 किलोमीटर का यह संपर्क मार्ग इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी यह रास्ता सिर्फ कच्चा, उबड़-खाबड़ और पत्थरीला ही बना हुआ है।
बारिश आते ही तीनों गांव बन जाते हैं ‘टापू’
स्थानीय निवासियों के अनुसार इस रास्ते पर दो गहरे नाले हैं, जो बरसात में उफान पर आ जाते हैं। इससे पूरा क्षेत्र कट जाता है और गांवों का संपर्क शेष दुनिया से टूट जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमारों को अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सकता, और बुजुर्गों व महिलाओं के लिए तो यह मार्ग जीवन का अभिशाप बन चुका है।

हरिजन, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय!
गौर करने वाली बात यह है कि इन गाँवों में बड़ी संख्या में हरिजन, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग निवास करते हैं। लेकिन आज भी मूलभूत सुविधा — पक्की सड़क — से वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद न तो शासन ने सुनवाई की और न ही कोई सर्वे या स्वीकृति की कार्यवाही हुई।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया
ग्राम पंचायत सानोदा के सैकड़ों ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर तहसीलदार भरत पांडे व थाना प्रभारी सुनीता बिंदुआ के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, मुख्य सचिव, सागर कमिश्नर और जिला प्रशासन को ज्ञापन भेजा है। इसमें साफ चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिन के भीतर डगरई तिगड्डा से लहरपुरा होते हुए गेवलारी-सानांदा तक पक्की सड़क की स्वीकृति एवं कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो वे चक्काजाम, आमरण अनशन और सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
“कागज़ों में विकास, ज़मीनी हकीकत में बदहाल ज़िन्दगी”
यह मामला छतरपुर जिले की विकास योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक ओर सरकार स्मार्ट गांव और डिजिटल इंडिया की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आज भी सैकड़ों लोग कीचड़ और नालों के पार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी बचाने में लगे हैं।
जनता की मांगें – एक नज़र में
डगरई तिगड्डा से ग्राम लहरपुरा तक 7 किमी पक्की सड़क का निर्माण।
सड़क निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति शीघ्र दी जाए।
निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कराया जाए।
यदि माँग पूरी न हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन देने बालो मे प्रमुख रूप से ग्रामीणों में शामिल हैं:
सरपंच बाबूलाल, मनोज, छोटू मादक, हीरा, मनीष जैन , अजय, श्रीराम, भूपेन्द्र यादव, वबन, मान सिंह, लाखन, छोटेलाल, गणेश, गर्वन, अगरस, गंगाराम, राजेश यादव, तुलसी सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।









