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ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े, अब बन गए डिप्टी कलेक्टर | grew up in rural environment, now became deputy collector

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बैतूल26 मिनट पहले

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  • बैतूल की प्रियंका और प्रशांत बने डिप्टी कलेक्टर।
  • गांव का बेटा बना सुजीत बना डीएसपी।
  • MPPSC की परीक्षा में पाई सफलता।

अक्सर कहा जाता है कि प्रतिभा कभी किसी चीज की मोहताज नहीं होती। यदि मन में कुछ कर गुजरने की ललक हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता है। ऐसा ही जिले के तीन मेधावी विद्यार्थियों ने एमपीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी बनने का गौरव हासिल किया है। इनमें से एक शिक्षक की बेटी है तो दूसरा प्रिंसिपल का बेटा है। जो डिप्टी कलेक्टर बने है। जबकि डीएसपी बनने वाला युवा ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े हैं।

शिक्षक की बेटी प्रियंका बनी डिप्टी कलेक्टर

कामयाबी किस्मत की लकीरों से नहीं माथे के पसीने से मिलती है। बस इसके लिए आवश्यकता होती है तो कड़ी मेहनत और सख्त अनुशासन की। इन्हीं पंक्तियों के शब्दों को सच करते हुए बैतूल निवासी दीपक भलावी (शिक्षक बैतूल बाजार)की सुपुत्री प्रियंका भलावी ने एमपीपीएससी में 23 वी रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुई है। उनकी इस सफलता से निश्चित तौर पर उन्होंने बैतूल और आदिवासी समुदाय का नाम रोशन किया है। प्रियंका की प्रारंभिक शिक्षा गंज कन्या शाला, जेएच कालेज से हुई। इसके बादवह दिल्ली में तैयारी करने गई थी।

प्राचार्य के बेटे बने प्रशांत बने डिप्टी कलेक्टर

सेवानिवृत्त प्राचार्य आरआर उइके के पुत्र प्रशांत उइके ने भी एमपीपीएससी की परीक्षा शानदार रैंक में उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए हैं। प्रशांत का 2016 में भी डीएसपी के लिए चयन हो गया था लेकिन उनका एक्सीडेंट होने के कारण वह फिजिकल ट्रेनिंग नहीं कर पाए थे। इसके बाद भी उन्होंने अथक मेहनत की और डिप्टी कलेक्टर जैसे सम्मानीय पद पर चयनित होकर अपनी मेहनत का डंका बजा दिया।

प्रशांत की प्रारंभिक शिक्षा उत्कृष्ठ विद्यालय बैतूल और जेएच कॉलेज से हुई। इसके बाद राज्य सेवा अधिकारी की कोचिंग के लिए दिल्ली चले गए थे। उन्होंने बताया बिना लक्ष्य किए सफलता नहीं मिलती है। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना बेहद आवश्यक होता है।

गांव का बेटा बना सुजीत बना डीएसपी

आदिवासी ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बैतूल जिले के गांव ठेमगांव विजयग्राम के रहने वाले सुजीत पिता गणपत कड़वे ने पहले ही प्रयास में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग एमपीपीएससी 2023 में चयनित होकर डीएसपी का पद हासिल किया। सुजीत (गोलू) कवडे़ ने प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शाला विजयग्राम से हासिल की। उत्कृष्ट स्कूल बैतूल में दसवीं से 12वीं तक अध्ययनरत रहे। एग्रीकल्चर काॅलेज की डिग्री लेकर एमपीपीएससी और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी इंदौर से की। प्रथम प्रयास में एमपीएससी में डीएसपी के पद पर चयनित होकर अपने गांव एवं जिले का नाम रोशन किया। उल्लेखनीय है कि सुजीत की बड़ी बहन अश्विनी कड़वे पुणे महाराष्ट्र में इंजीनियर के पद पर पदस्थ हैं। वहीं, छोटी बहन डॉ. सोनाली कड़वे इंदौर में रेडियोलाजिस्ट हैं। बुआ संगीता चिल्हाटे प्राथमिक शिक्षिका हैं। अब सुजीत ने एमपीएससी में डीएसपी के पद पर चयनित होकर पूरे परिवार का गौरव बढ़ा दिया है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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