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ग्राउंड रिपोर्ट: बिजावर की काली रात… जब केन-बेतवा के विस्थापितों के आंसुओं पर बरसीं ‘खाकी’ की बौछारें, सरकारी काम में रोड़ा और पथराव पड़ा भारी

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अरविन्द जैन
​छतरपुर/बिजावर – कहने को तो यह लोकतंत्र है, लेकिन मंगलवार की रात बिजावर तहसील कार्यालय के बाहर जो कुछ हुआ, वह सत्ता और संघर्ष के बीच की एक खूनी लकीर जैसी थी। केन-बेतवा लिंक परियोजना की भेंट चढ़ने वाले ग्रामीणों और उनके हक की आवाज उठाने वाले नेता अमित भटनागर की गिरफ्तारी ने एक ऐसे संग्राम को जन्म दिया, जिसने आधी रात को बिजावर की सड़कों को ‘रणक्षेत्र’ बना दिया।

VIDEO CLick blue Link भूखी-प्यासी महिलाओं पर पुलिस ने छोड़ीं पानी की बौछारें, पथराव के बाद रणक्षेत्र बना तहसील परिसर!

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दोपहर 2 .30 बजे से आक्रोश की सुलगती चिंगारी
​दोपहर के सूरज के साथ ही बिजावर तहसील कार्यालय के सामने हुजूम जुटना शुरू हुआ। यह हुजूम उन ग्रामीणों का था, जो केन-बेतवा प्रोजेक्ट की फाइल में सिर्फ ‘विस्थापित’ बनकर रह गए हैं। उनकी मांग सरल थी—उनके नेता अमित भटनागर को रिहा करो। कांग्रेस, सपा और आप के झंडे एक साथ दिख रहे थे, लेकिन सबसे बड़ी ताकत थी उन महिलाओं की, जो अपनी गोद में मासूम बच्चों को लिए इंसाफ के इंतजार में बैठी थीं।

शाम 3 बजे से रात 10 बजे: चक्काजाम और प्रशासनिक कश्मकश
​प्रशासन (एसडीएम विजय द्विवेदी) ने अमित भटनागर की गिरफ्तारी को कानून व्यवस्था बनाए रखने के तहत की गई न्यायिक प्रक्रिया बताया और रिहाई के लिए प्रशासन ने जब 15 हजार रुपये की तीन सॉल्वेंसी (जमानतदार) की शर्त रखी, तो आंदोलनकारियों का धैर्य जवाब दे गया। इसे प्रशासन की ‘चाल’ मानते हुए ग्रामीणों ने बिजावर-मातगुवा मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। घंटों तक एसडीएम और तहसीलदार अपने ही कार्यालय में ‘कैद’ रहे। सर्द होती शाम में ग्रामीण भूखे-प्यासे डटे रहे, उम्मीद थी कि कोई तो उनकी बात सुनेगा।

रात 11:20 बजे: एक ‘बारात’ बनी विवाद की वजह
​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तनाव के बीच रात करीब साढ़े ग्यारह बजे एक मंदिर के पास से बारात निकल रही थी। बारात निकालने को लेकर प्रदर्शनकारी महिलाओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। यहीं से स्थिति बिगड़ना शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस पहले से ही मौके की तलाश में थी और इसी मामूली विवाद ने एक बड़े टकराव का रूप ले लिया।

रात 11.40 बजे, ‘पानी की तेज बौछारें’ और पथराव का तांडव, ​विचलित करने वाला मंजर-
​जब आधी रात को दुनिया सो रही थी, बिजावर तहसील के बाहर ‘आधी रात का रणसंग्राम’ शुरू हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए फायर ब्रिगेड से पानी की तेज बौछारें शुरू कर दीं। जब पानी की बौछारें उन भूखी-प्यासी महिलाओं और मासूम बच्चों पर गिरीं, तो चीख-पुकार मच गई। महिलाओं का सब्र टूट गया। अपने बच्चों को भीगते और कांपते देख ‘रणचंडी’ बनी महिलाओं ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा तहसील परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और कई युवकों को हिरासत में ले लिया।

बिजावर में एक मंच पर आए धुर विरोधी; कांग्रेस, सपा और ‘आप’ ने भरी हुंकार– अमित भटनागर की गिरफ्तारी ने बिजावर की राजनीति में वह कर दिखाया जो शायद चुनाव भी नहीं कर पाते। विस्थापितों के हक की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता की रिहाई के लिए आज विचारधाराओं की दीवारें ढह गईं। जिले के धुर विरोधी राजनीतिक दल एक ही जाजम पर नज़र आए, जिससे प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

केशु राजा और मोनू राजा ने संभाला मोर्चा
कांग्रेस की ओर से कद्दावर नेता केशु राजा और नवनिर्वाचित अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह मोनू राजा, ब्लॉक अध्यक्ष वरुण पटना ने अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में जान फूँक दी। कांग्रेस नेताओं ने दो-टूक कहा कि दमनकारी नीतियों के दम पर आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। अमित भटनागर की गिरफ्तारी को उन्होंने लोकतंत्र की हत्या करार दिया, हैरानी और चर्चा का विषय यह रहा कि कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के स्थानीय दिग्गज भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन दलों का एक साथ आना सत्ता पक्ष और स्थानीय प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। जहाँ अमूमन ये दल एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते हैं, वहां अमित भटनागर के मुद्दे पर उनकी ‘जुगलबंदी’ ने आंदोलन को अब ‘जन-आंदोलन’ का रूप दे दिया है।

पुलिस का दावा: “पहले पथराव हुआ, फिर हुई कार्यवाही”
घटना के संबंध में पुलिस का पक्ष अलग है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को हटाने के लिए पहले समझाइश दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, पथराव की शुरुआत महिलाओं की तरफ से हुई, जिसके जवाब में आत्मरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पानी की बौछारें छोड़ी गईं और हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। पुलिस ने मौके से कई प्रदर्शनकारी युवकों को हिरासत में भी लिया है।

पुलिस का ‘एक्शन’ शुरू, 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर FIR

बिजावर में बीती रात हुए ‘आधी रात के संग्राम’ के बाद अब कानून का डंडा चला है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन और पुलिस के साथ हुई झड़प के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 40 से ज्यादा लोगों के खिलाफ नामजद और अज्ञात एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

सरकारी काम में रोड़ा और पथराव पड़ा भारी

पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने, चक्काजाम करने और एसडीएम (SDM) को घेरकर जान जोखिम में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि भीड़ ने न केवल कानून की अवहेलना की, बल्कि पुलिस बल पर पथराव कर स्थिति को हिंसक बनाया।

वीडियो फुटेज से हो रही ‘पत्थरबाजों’ की पहचान

बिजावर पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही है। तहसील परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों और मौके पर मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो फुटेज को खंगाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पत्थरबाजी करने वाले एक-एक उपद्रवी को चिन्हित किया जा रहा है और जल्द ही गिरफ्तारियां शुरू होंगी।

ढोढ़न गांव के लोगों में बढ़ी बेचैनी

यह पूरा प्रदर्शन केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ढोढ़न गांव के विस्थापितों द्वारा किया जा रहा था। एफआईआर दर्ज होने के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में गिरफ्तारी का डर बैठ गया है। वहीं, विपक्षी दल इस कार्रवाई को ‘दमनकारी’ बता रहे हैं।

जनता के कुछ सवाल जो तीखे हैं-
​मानवीय संवेदना कहाँ थी? जो महिलाएं दोपहर से भूखी-प्यासी थीं, क्या उन्हें हटाने का रास्ता आधी रात को पानी की बौछारें छोड़ना ही था?

​अमित भटनागर का ‘जुर्म’ क्या है? क्या किसी विस्थापित की आवाज उठाना इतना बड़ा अपराध है कि उसके लिए सॉल्वेंसी की ऐसी शर्तें रखी जाएं जो ग्रामीणों की पहुंच से बाहर हों?

​बारात या बहाना? क्या पुलिस ने जानबूझकर बारात वाले विवाद को बड़ा बनाया ताकि बल प्रयोग करने का कानूनी आधार मिल सके?

​मौजूदा स्थिति रात १२.३० बजे:
​देर रात पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को जिन वाहनों से वह आये थे उन्ही वाहनों में बैठाकर उनके गांवों की ओर रवाना कर दिया है। बिजावर तहसील कार्यालय के बाहर अब भारी पुलिस बल तैनात है। सड़कों पर गिरे जूते, फटे हुए पोस्टर और पानी से भीगा हुआ मैदान उस संघर्ष की गवाही दे रहे हैं जो हक और हनक के बीच हुआ। प्रशासन ने भले ही भीड़ को तितर-बितर कर दिया हो, लेकिन केन-बेतवा प्रोजेक्ट से बेघर हो रहे लोगों के मन में लगी ‘आक्रोश की आग’ को पानी की बौछारें क्या बुझा पाएंगी ?

दूसरी ओर, बिजावर प्रशासन और पुलिस विभाग अब फूंक-फूँक कर कदम रख रहा है। सूत्रों के अनुसार, आधी रात के हंगामे और विपक्षी नेताओं की मौजूदगी के बाद प्रशासन पर “रिहाई” का भारी दबाव है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पुलिस का कहना है कि अमित भटनागर पर दर्ज मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत हैं। किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में आकर कानून की अवहेलना नहीं की जाएगी। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात रहेगा।

क्या बोले SDM विजय द्धिवेदी सुनें VIDEO click karen

#केन-बेतवा लिंक परियोजना : नियमविरुद्ध मुआवजे की मांग पर एसडीएम बिजावर ने संपूर्ण घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी

केन-बेतवा लिंक परियोजना से संबंधित नियमविरुद्ध मुआवजे की मांग को लेकर विगत मंगलवार को बिजावर में हुए प्रदर्शन एवं घटनाक्रम के संबंध में एसडीएम बिजावर श्री विजय द्विवेदी ने विस्तृत जानकारी दी।

एसडीएम ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा आमजन को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र हितग्राहियों को लाभ प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई पात्र व्यक्ति छूट गया है तो उसका सर्वे कर विस्तृत जांच की जाएगी और नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बारातियों से भी उलझ गए तथा मार्ग अवरुद्ध कर आमजन को परेशान किया गया। आम नागरिकों की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिगत प्रशासन द्वारा वॉटर केनन का उपयोग किया गया।

एसडीएम ने बताया कि अमित भटनागर द्वारा बिना पूर्व अनुमति धरना आयोजित किया गया था तथा लोगों को उकसाकर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। इस कारण पुलिस द्वारा विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया। सक्षम न्यायालय द्वारा जमानत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, किंतु संबंधित पक्ष द्वारा जमानत प्रस्तुत नहीं की गई, जिसके पश्चात उन्हें जेल में निरुद्ध किया गया।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नियमविरुद्ध मांगों को स्वीकार नहीं किया जा सकता, परंतु सभी जायज मांगों एवं शासन द्वारा निर्धारित सहायता प्रदान करने के लिए प्रशासन पूर्णतः तत्पर है। अधिकारियों द्वारा संवेदनशीलता के साथ लोगों को समझाइश भी दी गई है।

Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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