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एक फैसले ने बदल दी जिंदगी, गरीबी को हराकर कौशाम्बी की ये महिला बनी आत्मनिर्भर, अब कई महिलाओं को दे रही रोजगार!

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Kaushambi News: शिव देवी ने कौशांबी में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बैग बनाने का कारोबार शुरू किया, जिससे न सिर्फ उनका परिवार चला बल्कि 5 महिलाओं को भी रोजगार मिला. अब वह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं.

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शिव

शिव देवी 

हाइलाइट्स

  • शिव देवी ने बैग बनाने का कारोबार शुरू किया.
  • 5 महिलाओं को भी रोजगार मिला.
  • कौशाम्बी की महिला समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं.

कौशाम्बी: घर की जिम्मेदारियों का बोझ, सीमित आमदनी और बढ़ती जरूरतें—ये सब किसी भी परिवार को मुश्किल में डाल सकते हैं. लेकिन जब हौसला बुलंद हो और इरादा कुछ कर दिखाने का हो, तो हालात भी बदल जाते हैं. उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की शिव देवी ने ठीक यही कर दिखाया. एक समय था जब उनके पति की सिलाई की आमदनी से घर चलाना मुश्किल था, लेकिन आज वही शिव देवी अपने पति के साथ मिलकर खुद का बैग बनाने का कारोबार चला रही हैं और साथ ही दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं.

एक फैसला बना लाइफ का टर्निंग प्वाइंट
शिव देवी कौशांबी जिले के सैनी ग्राम सभा की रहने वाली हैं. उनके पति सतीश सिलाई का काम करते थे, लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार आराम से चल सके. इसी बीच साल 2018 में शिव देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया. यह फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया. समूह में शामिल होने के महज दो महीने बाद शिव देवी ने लोन लिया और उससे सिलाई मशीन खरीदी. इसके बाद उन्होंने अपने पति से मिलकर सिलाई का काम सीखा और बैग बनाने का काम शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने खुद की दुकान भी खोल ली. आज वह न सिर्फ अपने पति के साथ मिलकर बैग बनाती हैं, बल्कि 5 और महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं.

अब हो रहा मुनाफा
शिव देवी बताती हैं कि एक बैग बनाने में लगभग 275 रुपये की लागत आती है, जिसे वह 350 रुपये में बेचती हैं. इस मुनाफे से अब उनका घर अच्छे से चल रहा है. उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता मिला, और अब वह दूसरों के लिए मिसाल बन चुकी हैं. शिव देवी की यह कहानी बताती है कि अगर महिला सशक्तिकरण को सही दिशा मिले और जरा सा साहस जुटाया जाए, तो जिंदगी को बेहतर बनाना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है.

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एक फैसले ने बदल दी जिंदगी, गरीबी को हराकर कौशाम्बी की ये महिला बनी आत्मनिर्भर

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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