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wages of weavers are not increasing | बुनकरों की नहीं बढ़ रही मजदूरिी: ठप हो सकते हैं 50 हजार से ज्यादा पावरलूम, 1.50 लाख से ज्यादा लोगों की रोजी रोटी का साधन है पावरलूम – Burhanpur (MP) News

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पावरलूम बुनकरों को पूरी पूरी मजदूरी नहीं मिल रही है। इसे लेकर अब बुनकर आंदोलन का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि टेक्सटाइल उद्योग संचालक कम मजदूरी दे रहे हैं। अगर एक हफ्ते के अंदर मजदूरी बढ़कर नहीं मिली तो बुनकर पावरलूम बंद कर आंदोलन करेंगे। शहर में

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पावरलूम बुनकर संघ अध्यक्ष व अधिवक्ता रियाज अहमद अंसारी ने बताया पावरलूम बुनकरों को टेक्स्टाइल से 25.25 रूपए से कम मजदूरी दी जा रही है। टेक्सटाइल द्वारा बुनकरों को 21, 22, 23, 24, प्रति पिक प्रति मीटर के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है। साथ ही साथ टीएल के नाम पर 100 मीटर से अधिक कपड़ा बुना कर लिया जा रहा है।

106, 108, 110 और 150 मीटर की जगह 162, 165, 168 का टांका बुनवाया जा रहा है। जबकि 100 मीटर 150 मीटर की मजदूरी दी जा रही है। कोण की घाटी के नाम पर बुनकरों से पैसे काटे जा रहे हैं। हफ्तेवारी पगार 4 हफ्ते, 6 हफ्ते, 8 हफ्ते या 10 हफ्ते में दी जा रही है। हफ्ते में 2 या 3 दिन लूम चल रहे हैं। अधिकतर पावरलूम बंद पड़े हैं।

बुनकर अपना जीवन यापन करने के लिए अपने पावरलूमों को तोड़कर कबाड़े में बेच रहा है। कम से कम शहर में 40 प्रतिशत से अधिक लूम बंद हैं। 60 फीसदी चल रहे हैं। समस्याओं के कारण बुनकर अपना बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पा रहा है।

यह भी आ रही परेशानी

-विद्युत मंडल द्वारा बिल पर पेनल्टी पर पेनल्टी लगा कर दी जा रही है। 3 माह से सुरक्षा निधि का पैसा भी जोड़कर बिल में वसूला जा रहा है। – पावरलूम बुनकर संघ ने इससे पहले 14 अप्रैल 2024 को अनिश्चितकाल के लिए बुरहानपुर के पावरलूम बंद किया था। तब कलेक्टर ने एक्शन में आकर लेबर कमिश्नर के बीच मध्यस्थता से पावरलूम बुनकर संघ और टेक्सटाइल के बीच बैठक कराई थी। लेबर कमिश्नर मेघा भट्ट ने टेक्सटाइल को यह ताकीद की थी कि बुनकरों की तयशुदा मजदूरी 25.25 रूपए देना होगी इसके बावजूद भी टेक्सटाइल संचालक कम मजदूरी दे रहे हैं। इससे बुनकरों मं आक्रोश पनप रहा है। – बिजली कंपनी द्वारा लाइन काटी जा रही है। मीटर उखाड़कर ले जाए जा रहे हैं। इसलिए बुनकर संघ ने एक हफ्ते का समय दिया है। अध्यक्ष ने कहा इसके बाद आंदोलन किया जाएगा। पावरलूम बंद कर दिए जाएंगे।

जानिए- क्यों नाराज हैं बुनकर

-कुछ सालों से मजदूरी नहीं बढ़ाई वर्ष 2018 में टेक्सटाइल कारोबारी और बुनकर संघ ने कपड़ा बुनाई की मजदूरी निर्धारित की। जिसके तहत बुनकर की मजदूरी प्रति पीक, प्रति मीटर कपड़ा बुनाई के 24.50 रुपए तय किए। – सूत कोन और कपड़ा बुनाई में घट का अंतर 60 रूपए सूत कोन के एक बोरे का वजन अलग.अलग होता है। तुलाई के पहले कुछ और होता है और बुनाई के बाद 4 से 5 किलो कम मिलता है। घट के अंतर का भुगतान बुनकर की मजदूरी से कट रहा है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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