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माता गुजरी जी ने छोटे साहेबजादों को सिर्फ लाड़ से पाला ही नहीं बल्कि उनको संस्कार भी दिए। ये ही कारण था जो छोटे साहेबजादे नींव में चिन गए। उनका बलिदान भारत के युवाओं के लिए एक आदर्श और प्रेरणा है। गुरुद्वारा श्री गुरु हरराय साहेब लिंबोदी में विशेष दीवान सजाए गए। इसमें चार साहेबजादे व माता गुजरी की शहादत को याद करते हुए खंडवा से आए कथाकार ज्ञानी जसवीर सिंह राणा ने उपरोक्त कथन कहे। उन्होंने कहा ये विश्व की ऐसी अनूठी शहादत है, जिसमें इतने छोटे बच्चों पर घोर अत्याचार किया गया हो पर वे अपने संस्कारों से पीछे नहीं हटे, जो उनके दादाजी गुरु तेग बहादुर जी और माता गुजरी जी ने दिए। इसी शहादत को याद करते हुए ज्ञानी हरि सिंघ ने कीर्तन और अरदास में शहीदों को आदारांजलि दी। अध्यक्ष अवतार सिंघ सैनी ने आभार माना ।

ज्ञानी जसवीर सिंघ राणा इतिहास बताते हुए।
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