[ad_1]

‘मेरा मोबाइल चालू रहेगा। जितना पैसा है, लगा ले, मैं गांव में मिलूंगा। जूते खाकर नहीं जाओ तो देख लेना, तुम आ जाना”।
यह कहना है इंदौर के गांधीनगर इलाके की एक बर्तन फैक्ट्री में
[ad_2]
Source link
[ad_1]

‘मेरा मोबाइल चालू रहेगा। जितना पैसा है, लगा ले, मैं गांव में मिलूंगा। जूते खाकर नहीं जाओ तो देख लेना, तुम आ जाना”।
यह कहना है इंदौर के गांधीनगर इलाके की एक बर्तन फैक्ट्री में
[ad_2]
Source link