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One dalit, three tribal girls mysteriously disappear | एक दलित-तीन आदिवासी लड़कियां रहस्यमयी तरीके से गायब: परिजन उधार लेकर तलाश रहे; डर से गांववालों ने बच्चियों को स्कूल भेजना बंद किया – Madhya Pradesh News

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विदिशा जिले के बरखेड़ा गांव में दो महीने में चार लड़कियां लापता हो गई हैं। इनमें से एक दलित और तीन आदिवासी हैं। दो बच्चियां नाबालिग हैं। इनके लापता होने के बाद अब तक उनकी न कोई खोज-खबर मिली है और न ही पुलिस से गांववालों को खास मदद।

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अब हालात ये हो चले हैं कि गांव वाले अपने बच्चों के लापता हो जाने के डर से उन्हें घर से बाहर भेजने में भी डरने लगे हैं। स्कूल की टीचर कहती हैं कि कई गांववालों ने तो लड़कियों की पढ़ाई ही छुड़वा दी है।

ये लड़कियां कैसे गायब हुईं, गांववालों के तमाम प्रयासों के बाद भी उनका कोई पता क्यों नहीं चल पाया है और पुलिस ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम विदिशा जिले से 70 किमी दूर बरखेड़ा गांव पहुंची।

यहां परिजन, स्कूल टीचर से बात की और पुलिस अधिकारियों से भी समझा कि आखिर लड़कियां कहां चली गई…पढ़िए, ग्राउंड रिपोर्ट

गांव की आबादी 2500, ज्यादातर दलित-आदिवासी और ओबीसी बरखेड़ा गांव विदिशा और सागर दो जिलों की सीमा से सटा है। लगभग 2500 की आबादी के इस गांव में दलित, आदिवासी और पिछड़ी जाति के लोगों की संख्या ज्यादा है। ज्यादातर लोग रोजगार के लिए पलायन कर जाते हैं। कुछ गांव में ही दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं।

जब भास्कर की टीम बरखेड़ा गांव पहुंची तो गांव के लोग खेतों पर जाने की तैयारी कर रहे थे। हमने इनमें से कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि गांव से चार लड़कियों के गायब होने की घटना पहले कभी नहीं हुई। पिछले दो महीने से परिवार और गांव के लोग उनकी तलाश कर रहे हैं, मगर कोई सुराग नहीं मिला है।

गांव वालों ने बताया कि इस घटना के बाद से लोग ज्यादा सतर्क हैं। बच्चों काे लेकर हर समय डर लगा रहता है। कहीं भी अकेले भेजना ठीक नहीं लगता। जरूरत पड़ने पर चले भी जाएं तो जब तक वापस न आ जाएं, चिंता बनी रहती है। खासतौर पर लड़कियों को लेकर डर ज्यादा है।

राम सिंह का घर, जहां से तीन लड़कियां गायब हुईं।

राम सिंह का घर, जहां से तीन लड़कियां गायब हुईं।

बेटी-बहू, भांजी एक साथ लापता गांव के एक छोर पर राम सिंह सहारिया का मिट्टी का घर है। राम सिंह की पत्नी राधा बाई घर की चौखट पर बैठी हैं। हमारे पूछने पर वो हमसे कहती हैं- 11 दिसंबर को दोपहर 3 बजे मैं अपने छोटे बेटे को डॉक्टर को दिखाने पठारी गई थी। घर में मेरी मंझली बहू कीर्ति, बेटी राधिका और भांजी आरुषि थी।

शाम साढ़े 5 बजे जब मैं घर वापस आई तो देखा कि जानवर घर के पास ऐसे ही खड़े हैं। घर खुला है। अंदर देखा तो वो तीनों घर में नहीं थीं। मैं और मेरा बेटा उन लोगों को गांव में खोजने निकल गए। मैं अपनी भांजी आरुषि के घर भी गई। वो लापता हो गई है, जानकर उसके घरवाले भी हैरान हाे गए। हम सब बहुत घबरा गए। जहां-जहां उम्मीद थी, हर जगह उन लोगों की तलाश की लेकिन वो कहीं नहीं मिलीं।

तीनों का कहीं पता नहीं चला राम सिंह सहारिया ने कहा- मैं गंजबासौदा में काम करता हूं। घर कम ही आ पाता हूं। मेरा बड़ा बेटा और बहू गुजरात में एक कंपनी में काम करते हैं। मंझला बेटा भोपाल में काम करता था। घर में मेरी पत्नी, बहू कीर्ति, छोटा लड़का, भांजी आरुषि और बेटी राधिका थीं।

जब आरुषि, कीर्ति और राधिका गायब हो गईं तो पत्नी ने मुझे फोन पर जानकारी दी। मैं तुरंत गांव पहुंचा। रातभर गांव, रिश्तेदार, बहू के मायके सभी जगह खोजबीन की लेकिन तीनों का कहीं कोई पता नहीं चला।

उस दिन मेरे साथ ही खेल रही थी आरुषि आरुषि के पड़ोस में रहने वाली उसकी दोस्त खुशबू बताती है- जिस दिन आरुषि गुम हुई, उस दिन मैं और आरुषि दिन में साथ में ही खेल रहे थे। घर में कुछ काम आया तो पापा बुलाने आए और मैं घर चली गई। फिर शाम को मैं आरुषि से मिलने उसके घर गई लेकिन वो घर में नहीं थी। आरुषि की मां बहुत रो रही थी। वो मुझसे कह रही थी कि पता नहीं, वो कहां चली गई। सब लोग उसको ढूंढ रहे हैं।

अब मुझे भी थोड़ा डर लगता है। आरुषि ने मुझे कभी ऐसा नहीं कहा कि वो कहीं जाने वाली है। वो तो उस दिन भी पहले की तरह ही मेरे साथ खेल रही थी। जब मुझे पापा बुलाकर ले गए, तब भी उसने कहा था कि जल्दी आ जाना, लेकिन जब मैं गई तो वो थी ही नहीं।

उधार लेकर हर जगह ढूंढा, पर वो नहीं मिलीं राम सिंह के मंझले बेटे गणेश बताते हैं- पहले मैं और मेरी पत्नी कीर्ति भी बड़े भैया के पास मजदूरी के लिए गुजरात गए थे, लेकिन वहां हमारी तबीयत खराब हो रही थी इसलिए घर आ गए थे। घर पर भी पैसों की जरूरत थी इसलिए इस बार मैं पत्नी को घर पर ही छोड़कर भोपाल काम करने चला गया था।

मेरी बहनें और पत्नी पता नहीं, कहां गायब हो गईं। कुछ समझ नहीं आ रहा। दो महीने से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा। हम लोग भी परेशान हैं, कीर्ति के मायके वाले भी परेशान हैं।

काम छोड़कर बेटी को ढूंढता रहता हूं आरुषि सहारिया के पिता धन सिंह कहते हैं- उस दिन मेरी बेटी रामसिंह के घर गई थी। वो उसकी बेटी और बहू के साथ उसी दिन से गायब है। मैंने उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन वो कहीं नहीं मिली। दो-तीन बार पुलिस भी घर पर आई। गांववालों से भी बातचीत की लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा।

अब तो ये हाल है कि कोई भी मुझसे कहीं भी बोल देता है कि उसने आरुषि को देखा है, तो मैं अपनी बेटी को बस ढूंढने निकल जाता हूं। काम छूट सा ही गया है। मेरे दो बेटों में वो अकेली बहन थी। बस मेरी बेटी मिल जाए और मुझे कुछ नहीं चाहिए।

आरुषि अपने माता-पिता के घर से उस दिन मामा के घर गई थी।

आरुषि अपने माता-पिता के घर से उस दिन मामा के घर गई थी।

23 दिन बाद पड़ोस की एक और लड़की गायब जिस घर से ये तीनों गायब हुई थीं, उस घर से तीन घर पहले ही कुसुम वंशकार का घर है। उस घटना के कुछ ही दिन बाद 4 जनवरी को कुसुम वंशकार की 18 साल की बेटी नेहा वंशकार भी अचानक गायब हो गई।

नेहा की मां कुसुम बताती हैं- उस दिन शाम सात बजे तक नेहा घर पर ही थी। मैंने उसे चाय के लिए पूछा तो उसने चाय पीने से मना कर दिया। रात करीब 8 बजे मैंने नेहा की छोटी बहन को उसे खाना खाने के लिए बुलाने भेजा तो उसने बताया कि दीदी कहीं दिख नहीं रही।

पिता गजराज वंशकार कहते हैं कि नेहा अपनी मां या मेरे साथ के बिना कभी घर से पठानी तक नहीं गई। जब वो पठानी स्कूल जाती थी, तब भी मैं उसे लेने-छोड़ने जाता था। कभी मार्केट जाना हो या किसी अन्य काम से, वो हमेशा अपनी मां के साथ ही जाती थी।

परिजन डर से लड़कियों को स्कूल नहीं भेज रहे पठानी सरकारी कन्या माध्यमिक स्कूल के प्रिंसिपल निरंजन सिंह बागड़ी कहते हैं- पुलिस ने गायब हुईं दो बच्चियों की जन्मतिथि की जानकारी हमसे मांगी थी। जानकारी हमने पुलिस प्रशासन को भेज दी है। गायब हुई दो लड़कियां आदिवासी समुदाय की हैं।

स्कूल प्रशासन लगातार बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने का कई सालों से प्रयास कर रहा है। हम इसमें सफल भी हो रहे थे लेकिन इस घटना के बाद से गांव वालों ने बच्चियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।

स्कूल की टीचर संगूजी राय कहती हैं कि पेरेंट्स डरे हुए हैं। वे कहते हैं कि ऐसी घटना के बाद बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है।

कुछ लीड्स मिली हैं, 3-4 दिन में पता लगा लेंगे एसडीओपी मनीष राज ने बताया- मामले में पुलिस ने लड़कियों के परिजन और गांववालों से बातचीत की है। स्कूल से भी उनका रिकॉर्ड लिया है। दो नाबालिग बच्चियां हैं, जो अपनी भाभी के साथ गई हैं। हमें इनके बारे में सूचना मिली है। दो या तीन दिन में पुलिस चारों को घर लेकर आएगी।

प्रदेश में तीन साल में 25 हजार से ज्यादा लड़कियां गुम पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन ने पिछले विधानसभा सत्र में प्रदेश में गुम हुई लड़कियों और महिलाओं का मामला उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि पिछले तीन साल में प्रदेश से गुम होने वाली लड़कियों और महिलाओं की संख्या कितनी है।

उनके सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया था कि 1 जुलाई 2021 से 31 मई 2024 तक विदिशा जिले में कुल 225 महिलाएं और बच्चियां अभी तक गुम हैं। वहीं, पूरे प्रदेश की बात करें तो इसी समयावधि में 23451 महिलाएं और 1919 बच्चियां गुम हुई हैं।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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