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शहर की इमामबाड़ा कमेटी ने मोहर्रम के महीने में छोटे तालाब पर स्थित इमाम बाडा पर नए वर्ष की तैयारी 7 जुलाई की शाम 6 बजे बाद शुरु की गई। इस्लामिक यह महीना सिर्फ नए साल की शुरुआत का प्रतीक ही नहीं है बल्कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने का भी पवित
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इस माह में हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए ताजियों का जुलूस निकाला जाता है। इस महीने में जरूरतमंदों की मदद शरबत के साथ 10 दिनों तक भंडारा भी किया जाता है।
हजरत इमाम हुसैन इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। 10वें दिन कर्बला के मैदान में 72 साथियों के साथ शहीद हुए थे। उनकी शहादत की याद में मोहर्रम के महीने के दसवें दिन को लोग आसुरे की विशेष नमाज अदा करते हैं। जिसे आशूरा का दिन भी कहते हैं। 10वें दिन मोहर्रम कर्बला में ले जाकर ठंडे किए जाते हैं।
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