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Indore’s beggars turned artists | इंदौर से रेस्क्यू किए भिक्षुक बना रहे गणेश प्रतिमाएं: 2 माह पहले ही तैयार कर ली 7 हजार ईको फ्रेंडली मूर्तियां; कभी नशे और अपराध में थे लिप्त – Indore News

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27 भिक्षुकों ने सुंदर प्रतिमाएं तैयार की है।

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इंदौर से रेस्क्यू किए गए 27 भिक्षुक अब सुंदर गणेश प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। ये कभी नशे के आदी थे। अपराधों में भी लिप्त रहे हैं। कुछ मानसिक बीमार भी थे। रेस्क्यू के बाद एक संस्था के माध्यम से इनका इलाज कराया गया।

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फिर जीने के तौर-तरीके सिखाकर रोजगार की ओर प्रेरित किया गया। नतीजा यह निकला कि गणेश उत्सव शुरू होने के 2 माह पहले ही भिक्षुकों ने अब तक 7 हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं तैयार कर ली हैं।

परदेशीपुरा स्थित संस्था ‘प्रवेश’ में तैयार हुई ये प्रतिमाएं ईको फ्रैंडली हैं। जिन्हें गोशालाओं के गोबर से बनाया गया है। अलग-अलग आकार के ये गणेश प्रतिमाएं वजन में बहुत हल्की और खूबसूरत हैं।

2022 में मिला था रेस्क्यू करने का जिम्मा इंदौर जिला प्रशासन ने 2022 से संस्था ‘प्रवेश’ को भिखारियों का रेस्क्यू कर पुनर्वास करने का जिम्मा दिया है। 3 साल से संस्था रेस्क्यू में जुटी थी। इस बार 2025 में कलेक्टर आशीष सिंह के भी स्पष्ट निर्देश थे कि शहर को भिक्षुक मुक्त बनाना ही है। इसके बाद तेजी से भिक्षुकों को पकड़ने का अभियान चलाया गया।

दरअसल, बीते सालों में 5 हजार से ज्यादा भिक्षुकों को पकड़ा गया। इनमें से 2 हजार से ज्यादा इंदौर के बाहर के थे। उन्हें मंदिरों, सड़कों, चौराहों, मेले के बाहर से रेस्क्यू कर उनके मूल स्थानों पर भेजा गया। करीब 480 पारदी और नाथ समाज के लोगों को घर भेजा गया। 2520 भिक्षुकों को पुनर्वास के लिए केंद्र पर लाया गया।

इनमें से कुछ का मेंटल हॉस्पिटल में इलाज भी चला। जिन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए तौर-तरीके, रहन-सहन सिखाया जा रहा है। इसके साथ ही भजन, योग, शिक्षा, रोजगार आदि के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

रेस्क्यू किए गए भिक्षुक गणेश प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं।

रेस्क्यू किए गए भिक्षुक गणेश प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं।

नेक काम की ऐसे हुई शुरुआत प्रवेश संस्था की अध्यक्ष रुपाली जैन ने बताया कि केंद्र पर अभी 93 भिक्षुक हैं। इन्हें रोजगार मिले इसके मद्देनजर इस बार इन्हें ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बनाने का प्लान तैयार किया गया। इसमें चुनौती उन भिक्षुकों की थी जो पहले मानसिक रूप से ‌विक्षिप्त थे और अब पहले से ठीक है। उन्हें प्रेरित और तैयार कर गोबर की गणेश प्रतिमाएं बनवाने का निर्णय लिया गया।

2100 का टारगेट था, ऑर्डर बढ़े तो 7100 बना ली

पहली बार 2100 प्रतिमाएं बनाने का लक्ष्य था लेकिन यहां विजिट करने वाले लोगों ने जब खूबसूरत ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं देखी तो काफी तारीफ की और ऑर्डर दिए। इनमें सरदारपुर से 2 हजार, इंदौर से 500 सहित छत्तीसगढ़ से ऑर्डर हैं। इसके मद्देनजर अभी 7100 प्रतिमाएं तैयार की हैं।

ये प्रतिमाएं 4, 6, 7, और 9 इंच के आकार की हैं। इन मूर्तियों की थोक कीमत 201 रु. से लेकर 451 रु तक है, जबकि 9 इंच की बड़ी प्रतिमाओं की कीमत 2 हजार रु. से शुरू होती है।

मौसम खुला तो फिर शुरू करेंगे काम अन्य सामग्रियों में मोतियों की माला, अगरबत्ती, धूप बत्ती, रुई की बाती, शुद्ध कपूर की गोलियां और गोबर के ही आकर्षक अगरबत्ती स्टैंड भी बना रहे हैं। यह पूरी शृंखला न केवल उनकी आस्था दर्शाती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश भी देती है। चूंकि अभी बारिश का दौर चल रहा है इसलिए काम रोका गया है। अगर मौसम खुला रहा तो फिर काम शुरू किया जाएगा। इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को है। इसके मद्देनजर तैयारियां भी जरूरी हैं।

जानिए, प्रतिमा बनाने में जुटे भिक्षुकों की कहानी

अब्दुल मजीद का कहना है कि उन्हें प्रतिमाएं बनाने से खुशी मिलती है।

अब्दुल मजीद का कहना है कि उन्हें प्रतिमाएं बनाने से खुशी मिलती है।

मन को मिलती संतुष्टि और खुशी अब्दुल मजीद (40) को 6 मार्च 2025 पाटनीपुरा से रेस्क्यू किया था। वह इंदौर के हैं और 16 सालों से मानसिक विक्षिप्त अवस्था में शहर में घूमते रहते थे। केंद्र में लाने के उपरांत इन्हें मानसिक चिकित्सालय में इलाज करवाया गया तो थोड़ा सुधार आया। अभी अपना काम खुद कर लेते हैं। वे गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम खुशी से करते हैं। अब वे इसमें रम गए हैं।

उनका कहना है कि मुझे इस काम से संतुष्टि और खुशी मिलती है। गणेश प्रतिमा बनाने वालों में वह जैद अली भी हैं जो सात सालों तक बेड़ियों में जकड़ा रहा। वह अब ठीक होकर घर जा चुका है।

नशा छोड़ा, अब गणेशजी बनाने में रमे 6 मार्च 2025 को नशे की हालत में 32 साल के रवि को भिक्षावृत्ति करते हुए बॉम्बे हॉस्पिटल के सामने से रेस्क्यू किया था। वह 15 वर्ष की उम्र से मादक पदार्थों का सेवन कर रहा था। परिवार में केवल मां है। उन्होंने रवि का नशा छुड़ाने के सारे प्रयास कर लिए लेकिन सफल नहीं हो सकी।

संस्था में लाने पर उसने शुरुआती दिनों में खुद को नुकसान पहुंचाने का भी प्रयास किया। फिर धीरे-धीरे योग और स्नेह के माध्यम से उनका नशा छुड़ाने में मदद की गई। अब स्थिति यह है कि वह पूरी तरह से नशा छोड़ चुका है। वह एक माह से ज्यादा समय से गणेश प्रतिमाएं बनाने में लगा हुआ है। उसे इससे मानसिक शांति का अनुभव होता है।

केंद्र पर प्रतिमाएं बनाने में जुटा एक भिक्षुक युवक।

केंद्र पर प्रतिमाएं बनाने में जुटा एक भिक्षुक युवक।

परिवार से बेदखल हुई तो भिक्षा मांगने लगी विमला ठाकुर को 6 मार्च 2024 को जिला कोर्ट के सामने शनि मंदिर पर भिक्षावृत्ति करते हुए रेस्क्यू किया था। वह 11वीं तक पढ़ी है और अच्छे परिवार से हैं। पारिवारिक झगड़े और कुछ गलतफहमियों के कारण उन्हें घर से निकाल दिया गया। इस पर वे इधर-उधर भटकती रही और भिक्षावृत्ति करने लगी।

जब केंद्र पर लाए तब हीमोग्लोबिन 5 था। उनका अस्पताल में इलाज करवाकर व्यवस्थित जीवन जीने का हौसला दिया गया। अब वह प्रशिक्षण बाद गोबर के गणेश की फिनिशिंग करना, उन्हें कलर करना, मोतियों की माला बनाने का काम कर रही है।

यह खबर भी पढ़ें… इंदौर के इंजीनियर को भिक्षुक समझा, आश्रम पहुंचाया

बुजुर्ग भिक्षुक देवव्रत चौधरी (नीले कुर्ते में) के साथ सेवाधाम आश्रम के संचालक सुधीर गोयल।

बुजुर्ग भिक्षुक देवव्रत चौधरी (नीले कुर्ते में) के साथ सेवाधाम आश्रम के संचालक सुधीर गोयल।

इंदौर को भिक्षुक मुक्त करने के लिए 15 अप्रैल को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजे जाने वालों में एक मीसाबंदी भी शामिल है। प्रशासन ने उनको भिक्षुक समझकर यहां पहुंचा दिया। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर बुजुर्ग देवव्रत चौधरी (72) फर्राटेदार अंग्रेजी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी नेता विनोबा भावे के साथ के अपने अनुभव भी सुनाते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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