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प्रदेश में लड़कियों, बालिकाओं को बेचने और उनकी तस्करी की कार्यवाही हो रही है। इसे रोकने के लिए अब महिला और बाल विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि वे जिला स्तर पर टॉस्क फोर्स बनाकर ऐसी गतिविधियों को रोकें। ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार होन
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कलेक्टरों को यह निर्देश महिला और बाल विकास विभाग की आयुक्त सूफिया फारुकी वली ने दिए हैं। इसमें बालिकाओं, युवतियों और विवाहित महिलाओं के साथ हो रही क्रूरता को रोकने और कार्यवाही करने के लिए कहा गया है। कलेक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे बेची जाने वाली और तस्करी का शिकार बन रहीं महिलाओं, बालिकाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई करें। इसके लिए टॉस्क फोर्स का गठन करने के साथ मानिटरिंग सेल भी गठित करने के लिए कहा गया है।
टॉस्क फोर्स में ये विभाग होंगे शामिल
- पुलिस विभाग
- महिला और बाल विकास विभाग
- पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग
- शिक्षा विभाग
- आदिम जाति कल्याण विभाग
- श्रम विभाग
- पर्यटन विभाग
- कौशल विकास विभाग
- स्वास्थ्य विभाग
- अन्य विभाग
- स्वयं सेवी संगठन
कलेक्टरों को यह मिले निर्देश
- बेची या तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) की जा रही महिलाओं, बालिकाओं से संबंधित गतिविधियों की मॉनिटरिंग और कार्ययोजना बनाकर कार्यवाही जिला टॉस्क फोर्स करेगी।
- जिलों में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग की जाए तथा चिन्हित क्षेत्रों में मॉनिटरिंग कर कार्यवाही हो।
- मैपिंग में स्थानीय एनजीओ का सहयोग लिया जा सकता है जिसके माध्यम से ऐसे परिवारों, समुदाय, क्षेत्रों की जानकारी मिल सके। इन्हें पूरी प्रक्रिया में भी शामिल किया जा सकता है।
- जिले के प्रमुख नम्बर जैसे पुलिस का नम्बर, वन स्टाप सेंटर, महिला हेल्प लाइन आदि नम्बरों का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए।
- सभी विभागों के समन्वय से सामुदायिक स्तर पर जागरुकता गतिविधियों का आयोजन किया जाए। समुदाय में इस संबंध में कानूनी प्रावधान महिलाओं, बालिकाओं को बताए जाएं।
- महिलाओं, बालिकाओं की बिक्री और तस्करी की एक्टिविटीज पर कंट्रोल के लिए सामुदायिक जागरुकता, सामुदायिक मॉनिटरिंग हर हालत में की जाए।
- स्थानीय स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका प्रभावी होती है। उनके माध्यम से समुदाय स्तर पर जागरुकता संवाद किए जाएं और पंचायत स्तर पर ऐसी गतिविधियों की निगरानी के लिए जवाबदेही तय की जाए।
- प्रदेश की सीमाओं से सटे हुए जिलों व आदिवासी क्षेत्रों में ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने के लिए विशेष निगरानी तंत्र गठित किया जाए जिसमें पुलिस से समन्वय की कार्यवाही शामिल रहे।
महिला हितैषी योजनाओं का लाभ दें ताकि गरीबी से मुक्त हों परिवार
- विभाग के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सभी विभागों की महिला हितैषी योजनाओं के भी क्वालिटी वर्क पर फोकस किया जाए ताकि वंचित वर्ग तक हितलाभ हो। आर्थिक संकट के चलते परिवार द्वारा बेची जा रही और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की जा रही महिलाओं, बालिकाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।
- विभागों के समन्वय से जिलों की सभी बालिकाओं, युवतियों के सशक्तिकरण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए।
महिला बाल विकास विभाग की इन विंग को भी करें शामिल
- महिला और बाल विकास द्वारा हर जिले में मिशन शक्ति के अंतर्गत हब फार एम्पावरमेंट फार वुमन की जिला इकाई काम कर रही है। इन इकाइयों को भी जिला कार्ययोजना में शामिल किया जा सकता है।
- महिला और बाल विकास विभाग द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना, जाबाली योजना (सागर व छतरपुर), महिला हेल्पलाइन, वन स्टाप सेंटर, शक्ति सदन, सखी निवास आदि योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, इसके काम की समीक्षा की जाए।
- जिलों में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले शौर्य दल, महिला मंडल, स्व सहायता समूह के सदस्यों के आगे लाकर कुप्रथा के खिलाफ कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाए।
राष्ट्रीय महिला आयोग के पत्र के बाद एक्टिव हुई सरकार
राष्ट्रीय महिला आयोग ने पिछले माह मुख्य सचिव वीरा राणा को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया था कि तमिल पीपुल्स डेवलपमेंट काउंसिल ने राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष याचिका लगाकर एमपी के शिवपुरी जिले में लड़कियों और महिलाओं को किराए की पत्नी के रूप में बेचने और इसके लिए बाकायदा एग्रीमेंट किए जाने की जानकारी दी है। इसमें आयोग ने कहा है कि यह अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है जिसमें किराए पर पत्नी के रूप में तीसरे व्यक्ति को बेचने के पीछे मुख्य वजह गरीबी बताई गई है।
शिवपुरी की धड़ीचा प्रथा से खुला रेंट पर पत्नी ले जाने का मामला
प्रदेश के शिवपुरी में चलने वाली धड़ीचा प्रथा में बहू-बेटियां किराए पर दी जाती है। इसके लिए लगने वाली मंडी में कुंवारी लड़कियों से लेकर दूसरो की पत्नियां तक किराए पर दी जाती हैं। मंडी में पुरुष महिला का चाल-चलन देखकर उसकी कीमत लगाते हैं। अगर किसी पुरुष को कोई लड़की या महिला पसंद आ जाती है तो वो 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट कर तय समय के लिए महिला को ले जाते हैं। एग्रीमेंट पर दोनों पक्षों की शर्तें भी लिखी होती हैं।
सौदे की शुरुआत 15 हजार से लाखों रुपए तक
ऐसी मंडी में महिलाओं की कीमत 15 हजार रुपये लाखों रुपए तक हो सकती है। यदि किसी पुरुष को महिला पंसद आ गई हो और उसे उसके साथ और समय बिताना हो तो उसे मंडी में जाकर दोबारा एग्रीमेंट बनवाना होता है और फिर रकम अदा करनी होती है।
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