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रीवा में सावन के पहले सोमवार शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। जहां रीवा के प्रसिद्ध महामृत्युंजय मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालुगण दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं कोठी स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर में भी भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए सुबह स
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भक्ति में डूबे भक्त कतार में क्रमबद्ध तरीके से खड़े होकर अपना नंबर आने की प्रतीक्षा करते रहे। सभी घरों से पूजन सामग्री लेकर पहुंचे। सावन के पहले सोमवार की वजह से शिव मंदिरों के पट आज सुबह 4 बजे से ही खोल दिए गए। जहां शिवालयों में ओम नमः शिवाय,बम-बम और महादेव के नारे गूंजते रहे। सावन के पहले सोमवार हर शिव भक्त शिवलिंग के विधिवत पूजन-अर्चन के लिए बेताब नजर आया।
महामृत्युंजय मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि सनातन परंपरा में सावन के महीने का विशेष महत्व है। ये महीना जप, तप और शिव जी की भक्ति के नाम समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन के समय जो विष निकला था। उसका पान भगवान शिव ने किया था। शिव जी के विषपान करने के कारण शिव जी के शरीर में बहुत ही गर्मी हो गई। इस कारण सावन के महीने में शिव के मन और तन को शांत करने से शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है।
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