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उज्जैन के सिंहपुरी स्थित माता सरस्वती की प्रतिमा
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानि बसंत पंचमी सोमवार 3 फरवरी को रेवती नक्षत्र व साध्य योग में मनाई जाएगी। इस दिन रवियोग का भी संयोग रहेगा। यह संयोग सभी प्रकार के मांगलिक कार्य में अनुकूलता के साथ-साथ प्रगति कारक माना जाता है। इस दिन पूजन पाठ के
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माता सरस्वती के मंदिरों में विद्यार्थी सफलता की कामना लेकर पूजन करते हैं एवं बसंती पीले पुष्प अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजन करने से माता सरस्वती का आशीर्वाद मिलता है और परीक्षा में सफलता की प्राप्ति होती है।

सिंहपुरी स्थित माता सरस्वती की प्रतिमा पर विद्यार्थी स्याही चढ़ाते हैं। (फाइल फोटो)
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर माता सरस्वती के प्राकट्य का एक प्रभाग माना गया है। इस दिन माता सरस्वती की विभिन्न आयामों के माध्यम से पूजन की परंपरा भी शास्त्र में बताई जाती है। विद्यार्थी सरस्वती स्तोत्र का पाठ करते हैं।
मान्यतानुसार उज्जैन के सिंहपुरी स्थित माता सरस्वती की प्रतिमा पर कई विद्यार्थी स्याही चढ़ाकर पीले पुष्प अर्पित करते हैं। यह करने से माता सरस्वती की कृपा उन्हें प्राप्त होती है। इसके अलावा माता सरस्वती का पूजन अपने घर में भी किया जा सकता है। इससे मन, बुद्धि, वाणी पर संतुलन रहता है।
माघ मास की पंचमी गुप्त नवरात्रि की पंचमी भी है और यह पंचक के पांचवे नक्षत्र में आती है। इस दौरान की गई साधना पांच गुणित शुभ फल प्रदान करती है। साधकों व उपासकों को इस दिन माता की साधना आराधना करनी चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला।
तिथि का मतांतर 3 फरवरी को ही बसंत पंचमी का पर्व
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार पंचांग की गणना में तिथियों का मतांतर है। इसका मुख्य कारण है कि अलग-अलग पंचांग अलग-अलग समय से तैयार किए जाते हैं। उज्जैन के मानक समय और अन्य पंचागों में भारतीय मानक समय इस बात का अंतर स्पष्ट करता है। तिथि की गणना से रविवार को प्रात: करीब 10:49 बजे पंचमी तिथि का आरंभ होगा, जो अगले दिन 3 फरवरी सोमवार को साढ़े तीन घंटे रहेगा। पंचांग की गणना, भारतीय ज्योतिष शास्त्र एवं धर्म शास्त्रीय मान्यता से देखें तो उदयकाल की तिथि यदि तीन मुहूर्त व्यापी नही हो तो उसे ग्राही कर लेना चाहिए। विशेषकर जब ऋतुराज बसंत का आगमन हो तो सूर्य के आरंभ काल की उपस्थिति विशेष मानी गई है। इस आधार पर 3 फरवरी को रेवती नक्षत्र में बसंत पंचमी का पर्व मनाना शास्त्र उचित है।
नया कार्य प्रारंभ करने व खरीदी का शुभ मुहूर्त
पं. डब्बावाला ने बताया कि बसंत पंचमी का मुहूर्त अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है। इस दिन सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। किंतु कुछ विशेष कार्य विशेष मुहूर्त पर ही करना चाहिए। इस दिन रवि योग है। इस दृष्टि से नए कार्य की शुरुआत, नया निवेश किया जा सकता है। विशेष कर किसी बड़ी पॉलिसी या स्वर्ण या भवन की खरीदी की जा सकती है।
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