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An evening in Indore in the name of Kishore Kumar | इंदौर में एक शाम किशोर कुमार के नाम: नीले-नीले अंबर पर… गीत से शुरू करके कलाकारों ने किशोर दा की आवाज को मंच पर कर दिया जीवंत – Indore News

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लाभमंडपम ऑडिटोरियम में शनिवार को एक शाम किशोर कुमार के नाम का आयोजन किया गया। मंडलोई फाउंडेशन और टाटा टिस्कान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को किशोर कुमार के साथ जुड़ी यादों के सुनहरे पलों को संजोने के उदेश्य से आयोजित किया गया। इस अवसर पर किशोर कुमार क

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संगीत संध्या की जानकारी देते हुए विनोद कुमार मंडलोई ने कहा कि वैसे तो किशोर कुमार जी के गीतों पर अनेक कार्यक्रम होते हैं, किशोर कुमार जी की आवाज़ ही ऐसी है जो सबके मन को छू लेती है और उनकी आवाज़ और गीतों को बार बार सुनने का मन करता है, लेकिन एक शाम किशोर के नाम कुछ मायनो में अलग है, विशेष है । सुरों की इस शाम में किशोर के गीतों को अनिल श्रीवास्तव, दिव्या मंडलोई ने गीतों की प्रस्तुति दी।

संगीत संयोजन मुंबई के संगतकारों की 13 सदस्य टीम द्वारा किया गया। इस सुंदर शाम को सुनने आए लोगो से हॉल अखरी गीत तक भरा रहा। जुगलबंदी में जहां कोरा कागज़ था ये मन मेरा गीत को अनिल और दिव्या ने एक तार में पिरोया वहीं हमें और जीने की चाहत न होती…आने वाला कल जाने वाले जैसे ऊंचे स्वर के गीत को मंच पर अनिल ने बहुत खूबसूरती से निभाया। इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक किशोर एरा के गीतों से ये शाम सजा दी। आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज है… सागर किनारे दिल ये पुकारे….गीत के बाद आई दिव्या की सोलो परफॉर्मेंस की बारी। अजी रूठ कर कहां जाइएगा… गीत को सुरीले अंदाज में सुनाया। दिव्या ने आईयो आईयो आईयो की शुरुआत से दिल विल प्यार व्यार में क्या जानू रे गीत से सभी के मन को गुदगुदा दिया।

ये शाम देर रात तक चली यादों के कुछ किस्सें किशोर कुमार और गांगुली परिवार से कई पीढ़ियों से जुड़े खंडवा के मूल निवासी मंडलोई परिवार का किशोर कुमार का खंडवा से प्रेम और इंदौर से लगाव किसी से छुपा नहीं है। किशोर कुमार का बचपन खंडवा में बीता और गांगुली और मंडलोई परिवार का पुराना साथ रहा। विनोद कुमार मंडलोई, किशोर कुमार के साथ स्कूल पढ़ते थे और अशोक कुमार किशोर कुमार और अनूप कुमार की जिंदादिली और हरफनमौलापन उनके व्यक्तित्व पर आजीवन छाया रहा। यह कार्यक्रम उनकी याद में सभी संगीत प्रेमियों को समर्पित है। इन गीतों की हुई प्रस्तुति-नीले-नीले अंबर पर…, चलते-चलते मेरे ये…, ओ मेरे दिल के चैन…, दिल क्या करे…, मेरे महबूब कयामत…, मेरे सपनों की रानी…, दिलबर मेरे कब तक। संचालन आशीष दवे ने किया।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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