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Told my daughter- Police beats people here, don’t come here | बेटी से कहा– यहां पुलिस पीटती है, आना मत: 19 दिन बाद बेटा–बेटी के साथ सड़ी–गली लाश मिली; हत्या का आरोप – Mauganj News

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‘पिताजी से आखिरी बार 17 मार्च की सुबह बात हुई थी। कहा था- दोपहर में पुलिस वाले उनको बहुत मारे थे। बच्चों को भी पीटा है। बेटा, घर नहीं आना। हो सकता है मुझे लेकर जाएं। हमें नहीं पता था कि पुलिस वाले उन्हें मार कर लटका देंगे। इतने छोटे-छोटे भाई-बहन कैसे

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यह मंजू साकेत है। मऊगंज के गड़रा गांव में शुक्रवार को उसके पिता औसेरी साकेत (55), बेटी मीनाक्षी (11) और बेटे अमन (8) के शव फंदे पर मिले हैं। शव पूरी तरह सड़ और गल चुके हैं। पुलिस का मानना है कि लाशें करीब 15 दिन से ज्यादा पुराने हो सकती हैं।

इसी गांव में 15 मार्च को सनी द्विवेदी की पीट-पीटकर हत्या के बाद हुई हिंसा में एएसआई रामचरण गौतम की मौत हो गई थी। हिंसा के 19 दिन बाद गांव एक बार फिर चर्चा में है।

दैनिक भास्कर ने गांव में औसेरी की बेटी मंजू साकेत, बेटा पवन साकेत, चचेरे भाई पुरुषोत्तम साकेत, कुछ गांव की महिलाओं और एसपी नीरज सोनी से बात की। परिवारवालों और गांव वालों का आरोप है कि पुलिसकर्मी घर में घुसकर पिटाई करते हैं। यहां तक कि महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा।

गड़रा गांव स्थित इसी घर से बदबू आ रही थी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

गड़रा गांव स्थित इसी घर से बदबू आ रही थी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

हिंसा के 21 दिन बाद भी दरवाजों पर ताले, सड़कों पर सन्नाटा

मऊगंज हिंसा काे 19 दिन बीत गए हैं। आज भी गड़रा गांव में बीएनएस की धारा 163 लगी है। करीब 30 का पुलिस बल (जिसमें 25 क्यूआरएफ और जिला पुलिस बल, 1-4 की गार्ड 25वीं बटालियन) दो अलग-अलग शिफ्ट में तैनात हैं।

अधिकांश घरों पर ताला लटका है। सड़कें आज भी सूनी हैं। जो लोग मौजूद हैं, वे दहशत में जी रहे हैं। दहशत ऐसी कि इतने दिन तक घरों में कैद होकर रह गए हैं। कई लोग तो बाहर तक नहीं निकले। लोगों का कहना है कि पुलिस घरों से नहीं निकलने देती। गांव में बिना इजाजत आने-जाने पर रोक है। जिस घर में तीन लाशें मिली हैं, वह हिंसा वाले घर से करीब 500 मीटर दूर है।

27 अप्रैल को बेटे की शादी

औसेरी लाल साकेत ने तीन शादियां की थीं। पहली शादी करीब 35 साल पहले की थी। शादी के कुछ दिन बाद पत्नी की बीमारी से मौत हो गई। करीब एक साल बाद दूसरी शादी की। दूसरी पत्नी दसोदरी साकेत से तीन बेटी और एक बेटा है। इसमें सबसे बड़ी मंजू साकेत, दूसरी पुष्पा, तीसरी चंपा और बेटा पवन साकेत है। साल 2007 में दसोदरी की भी बीमारी से मौत हो गई। बच्चों की देखभाल करने के लिए तीसरी शादी की। इससे उसे मीनाक्षी और अमन का जन्म हुआ। सात साल बाद वह भी छोड़कर चली गई। औसेरी लाल सिलाई करके पेट पालते थे। हिंसा के बाद काम बंद हो गया।

15 मार्च को हुई हिंसा के बाद करीब यहां 30 पुलिसकर्मी आज भी तैनात हैं।

15 मार्च को हुई हिंसा के बाद करीब यहां 30 पुलिसकर्मी आज भी तैनात हैं।

बेटी बोली– पुलिसवालों ने लटका कर मार डाला

बेटी मंजू साकेत ने बताया, ‘ 17 मार्च को पिताजी से सुबह बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि बेटा घर नहीं आना। पुलिस वाले बहुत मार रहे हैं। हो सकता है मुझे लेकर जाएं। मैंने कहा था कि आप बेकसूर हैं। अगर ले जाएंगे, तो किसी दिन छोड़ेंगे। उसके बाद दूसरे दिन कॉल किया, तो मोबाइल स्विच ऑफ बताने लगा। मुझे नहीं पता था कि पुलिस वाले मार के उन्हें लटका देंगे। मेरे छोटे-छोटे भाई बहन को खुद फांसी कैसे लगा लेंगे। पुलिस वालों ने तीनों की हत्या कर दिए फंदे पर लटका दिया है।’

औसेरी के बेटा पवन साकेत ने बताया कि तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। मेरी 27 अप्रैल को तिलक और 29 अप्रैल को शादी होनी है। इससे पहले ही घर से तीन अर्थियां उठ गईं।

गांव में आने–जाने की अनुमति नहीं

चचेरे भाई पुरुषोत्तम साकेत का कहना है कि 14 मार्च को भाई से मिला था, लेकिन हिंसा के बाद से गांव में आने की अनुमति नहीं मिली। इस कारण नहीं मिल सके। तीनों की हत्या के बाद फंदे पर लटकाया गया है।

औसेरा के छोटे भाई रामधारी साकेत बताते हैं कि 17 मार्च की दोपहर ही भैया से मुलाकात हुई थी। इसके बाद से नहीं मिले। बहुत कोशिश की, लेकिन पुलिसवाले घर से नहीं निकलने देते थे। इस कारण हम परिवार से नहीं मिल पा रहे थे।

गड़रा गांव में हिंसा के 19 दिन बाद भी कई घरों में ताला लटका है।

गड़रा गांव में हिंसा के 19 दिन बाद भी कई घरों में ताला लटका है।

गांव वाले बोले- पुलिस ने जमकर पीटा

गांव की रहने वाली शशि कला साकेत बताती हैं, ‘मेरे पति राम कैलाश साकेत को हिंसा के आरोप में पुलिस ले गई है, जबकि वह घटना में शामिल नहीं थे। घटना के वक्त हम अपने घर में थे। बड़ा बेटा सोनू साकेत हाथ और दोनों पैर से दिव्यांग है। फिर भी रात में पुलिस वाले आए। हम दरवाजा बंद कर सो रहे थे। पुलिसकर्मियों ने गेट तोड़कर हमें निकाला। पूरे परिवार को बुरी तरह मारा। दिव्यांग बेटे को भी नहीं छोड़ा। तीसरे दिन दोपहर दोबारा पुलिस आई। दोनों बेटों सोनू और प्रभाकर समेत पति को बिना कुछ पूछताछ किए उठाकर ले गए। हम मजदूरी करते हैं। खेत में फसल खड़ी है, उसे कौन काटेगा। जानवर पूरी फसल खा गए होंगे। पति और बेटे जेल में हैं। अब भूखों मरने की नौबत है।

गांव की ही रहने वाली निर्मला साकेत बताती हैं, ’ मेरे पति राम सजीवन साकेत समेत बेटा रोहत और दो भतीजे सुरेश और कृष्ण कुमार जेल में हैं। असलियत में चारों निर्दोष हैं। हिंसा वाले वक्त तो हम खेत में फसल काटने गए थे। 17 मार्च को पुलिस लोगों को मार-मारकर गाड़ी में डालकर ले गई थी। मुझे भी पीटा, जिससे हाथ में फ्रैक्चर हो गया। हमारे पास पैसे नहीं हैं। बहन ने पट्‌टी करवाई है। खेती को पशु खा रहे हैं। घर पर बच्चे रो रहे हैं। पेट पालने का साधन नहीं है। ऊपर से पुलिस वाले भी पीटते हैं। कहीं आने-जाने नहीं देते।

निर्मला साकेत का कहना है कि पुलिस ने ऐसी मारपीट की कि उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया।

निर्मला साकेत का कहना है कि पुलिस ने ऐसी मारपीट की कि उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया।

पुलिस पर मारपीट का आरोप गलत

मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जो भी तथ्य इसमें सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हिंसा और इस घटना का कनेक्शन फिलहाल समझ नहीं आया है। यह पूरी तरह अलग घटना है। प्राथमिक तौर पर आत्महत्या लग रहा है। शव पूरी तरह गल चुके हैं। यह कितने पुराने है, यह नहीं कहा जा सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

पुलिस द्वारा मारपीट का आरोप भी ठीक नहीं लगता। अगर ऐसा हुआ होता, तो लोग शिकायत जरूरत करते। यहां सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार भ्रमण कर रहे हैं। अभी तक ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है।

जानिए, 15 मार्च को क्या हुआ था

15 मार्च को गडरा गांव में बवाल हुआ था। तब सनी द्विवेदी नाम के युवक की आदिवासियों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। साथ ही एएसआई रामचरण गौतम पर भी हमला हुआ था, जिसमें वे शहीद हो गए थे। इस घटना में 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। तब से गांव में धारा 144 लागू है और पुलिस कैंप लगाकर सुरक्षा की जा रही है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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