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गौ मूत्र से शख्स ने शुरू किया कारोबार, पतंजलि व कई कंपनियां हैं इनकी ग्राहक! करोड़ों में है टर्नओवर

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बाड़मेर के एक शख्स ने स्वदेशी उत्पाद बनाने का ऐसा संकल्प लिया कि आज वह गौमूत्र से गौधन अर्क बनाकर पतंजलि व कई बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियों को गौधन अर्क की सप्लाई कर रहे हैं. उनका टर्नओवर आज करोड़ों का है.

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गोमूत्र

गोमूत्र से गौधन अर्क बनाते हुए

हाइलाइट्स

  • मांगीलाल बोथरा का टर्नओवर करोड़ों में पहुंचा.
  • पतंजलि और अन्य कंपनियों को करते हैं गौधन अर्क सप्लाई.
  • 2000 लीटर गौमूत्र से 1500 लीटर गौधन अर्क बनता है.

बाड़मेर. पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर के रहने वाले एक शख्स गौमूत्र से गौधन अर्क बना रहे है, जिसकी सालभर की टर्न ओवर करोड़ो रुपये है. आपको बता दें यह सफलता की कहानी बाड़मेर के मांगीलाल बोथरा की है. उन्होंने खुद के शोरुम में विदेशी सामान बेचने के बाद मिले उलाहने के बाद स्वदेशी बनाने का काम शुरू किया. दरअसल उन्हें इलेक्ट्रॉनिक सामान के शोरूम में भारत से बाहर की कंपनियों के उपकरण बेचने पर लोगों के उलाहने मिले, जिससे उन्होंने स्वदेशी अपनाने का संकल्प ऐसा लिया कि वे आज साढ़े तीन लाख लीटर गौधन अर्क का उत्पादन कर बेच रहे हैं. बाड़मेर के इस शख्स ने इतनी शिद्दत से गौधन अर्क बनाने का प्लांट लगाया है, कि बड़ी मात्रा में हरिद्वार की पतंजलि और देश के बड़ी आयुर्वेद कंपनियां इनसे इसे खरीद रही हैं.

करोड़ों रुपये का है टर्नओवर
मांगीलाल बोथरा जिले की दूर दराज की ढाणियों से गौमूत्र एकत्रित करते हैं और इस अर्क को बनाते हैं. इसके बाद इसे देश के अलग अलग राज्यों में बेचते हैं. आज उनका इससे ही करोड़ो रुपये का टर्नओवर है. वह आजकल के लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं.

पूरे राजस्थान में गौधन अर्क के तीन प्लांट
आपको बता दें, कि बाड़मेर समेत पूरे राजस्थान में गौधन अर्क बनाने के तीन प्लांट है, इनमें से जोधपुर संभाग में केवल बाड़मेर में ही उत्पादन हो रहा है. अब तक केवल बाड़मेर से बीस लाख लीटर गौधन अर्क का उत्पादन किया गया है. अब आलम यह है कि तीन सौ लोगों के जरिए रोज दो हजार लीटर गौमूत्र प्लांट में आ रहा है. दो हजार लीटर गौमूत्र से प्रतिदिन पंद्रह सौ लीटर गौधन अर्क का उत्पादन हो रहा है.

4 रुपए प्रति लीटर खरीदते हैं गौमूत्र
आपको बता दें गौधन अर्क बनाने के लिए बॉर्डर के गांवों के गोपालकों से केवल देशी गायों का ही गौमूत्र एकत्रित किया जा रहा है. बॉर्डर के अलग-अलग गांवों में करीब तीन सौ घरों में गौमूत्र इकट्ठा करने के लिए बर्तन दिए गए हैं. प्रतिदिन प्लांट से गाड़ी जाती है और गांवों में गो पालकों के पास से गौमूत्र लेकर वापस प्लांट पर आती है. प्रति लीटर चार रुपए के हिसाब से हर गो पालक को हाथों-हाथ भुगतान किया जाता है.

2000 लीटर गौमूत्र से 1500 लीटर बनता है गौधन अर्क
गौधन अर्क बनाने वाले मांगीलाल बोथरा बताते है कि प्लांट पर आने के बाद दो हजार लीटर गौमूत्र से करीब पंद्रह सौ लीटर गौधन अर्क बनता है. गौधन अर्क बनने के बाद यहां से देश की बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियों को भेजा जाता है, जिससे उन्हें सालाना करोड़ो रूपये का टर्न ओवर होता है.

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गौ मूत्र से शख्स ने शुरू किया कारोबार, पतंजलि कंपनी भी है आज इनकी ग्राहक!

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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