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The biggest fearless Navratri festival of the west region of Indore | इंदौर के पश्चिम क्षेत्र का सबसे बड़ा निर्भय नवरात्रि महोत्सव: गरबा के बीच लुभा रहीं रामायण, महाभारत और नारी शक्ति पर आधारित प्रस्तुतियां – Indore News

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शहर के पश्चिम क्षेत्र का सबसे बड़ा निर्भय गरबा महोत्सव साल-दर-साल नई ऊंचाइयां छूता जा रहा है। विशाल पंडाल में गुजरात के कलाकारों के गरबा गीतों पर यहां साढ़े तीन हजार से ज्यादा बालिकाएं और महिलाएं गरबा की शानदार प्रस्तुतियां दे रही हैं। विधायक मनोज पटेल

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गरबा की प्रस्तुतियों के बीच रामायण, महाभारत और नारी शक्ति पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों से कई बार तालियां बजवाईं। देवी की स्तुति पर तलवार लेकर युवतियों ने जो प्रस्तुति दी, वह लंबे समय तक दर्शकों को याद रहेगी। एक बड़े सर्कल में हजारों बालिकाएं और महिलाएं गरबा करते हुए दिखाई देती हैं तो यह संस्कृति का समुद्र उत्साह की उठती लहरों की तरह महसूस कराता है। 7 अक्टूबर से इस महोत्सव का शुभारंभ हुआ और यह 11 अक्टूबर तक चलेगा। प्रस्तुतियां शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक छोटा बांगड़दा रोड स्थित मैदान में की जा रही हैं।.

बालिकाओं और कलाकारों को मंच देने का प्रयास

आयोजक विधायक मनोज पटेल कहते हैं कि शहर के पूर्वी क्षेत्र में तो नवरात्रि महोत्सव के कई बड़े गरबा होते हैं, लेकिन पश्चिम क्षेत्र इससे अछूता था। इस क्षेत्र की बालिकाओं और कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए हमने 8 साल पहले निर्भय गरबा महोत्सव का शुभारंभ किया। इसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र की बालिकाएं हिस्सा लेती हैं। यह महोत्सव पार्टिसिपेंट्स और दर्शक सभी के लिए पूरी तरह से नि:शुल्क है। कोरोना काल में एक साल यह महोत्सव नहीं हो पाया, बाकी सभी वर्षों में निर्भय गरबा महोत्सव आयोजित किया गया है।

शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता डॉ. गिरीशानंदजी महाराज से आशीर्वाद लेते निर्भय गरबा महोत्सव के आयोजक विधायक मनोज पटेल।

शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता डॉ. गिरीशानंदजी महाराज से आशीर्वाद लेते निर्भय गरबा महोत्सव के आयोजक विधायक मनोज पटेल।

फूहड़ता से दूर आध्यात्मिक वातावरण

यह गरबा महोत्सव फूहड़ता से दूर आध्यात्मिक वातावरण में होता है, इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि यह आयोजन शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता डॉ. गिरीशानंद जी महाराज के सान्निध्य में होता है। महाराजश्री ने बताया कि गरबा मां भगवती की प्रसन्नता, साधकों और रात्रि जागरण के लिए किया जाता है। यहां पर भगवती के चरित्रों को कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दिखा रहे हैं, समाज के लिए यह शिक्षा कि विषय है। बच्चों को भी अपने धर्म और शास्त्रों के बारे में जानने को मिल रहा है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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