छतरपुर। बुरा मत मानो, पुलिस है तुम्हारी सेवा में’… जैसे नारे उस वक्त तार-तार होते दिखे जब बड़ामलहरा थाने के भीतर से एक महिला को न्याय की जगह बर्बरता मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया। सुशासन और जनता की सुरक्षा का दम भरने वाली खाकी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। बड़ामलहरा थाने से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां न्याय की आस में बैठी एक बेबस महिला को पुलिसिया रौब और प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। आरोप है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) में दर्ज शिकायत वापस न लेने पर थाने के भीतर ही महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उसे बेरहमी से घसीटा गया। शनिवार को न्याय की उम्मीद लिए पीड़ित महिला ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचकर आला अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती बयां की।
इलाज का झांसा देकर थाने बुलाया, फिर शुरू हुआ प्रताड़ना का खेल
ग्राम बमनी छईछुआ की निवासी पीड़िता रामबाई ने पुलिस कप्तान को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि बड़ामलहरा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी सरमन कुमार ने उसे उपचार कराने का झांसा देकर फोन कर थाने बुलाया था। लेकिन थाने पहुंचते ही पुलिसकर्मी का रवैया बदल गया। वह महिला पर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज उसकी शिकायत को जबरन वापस लेने का अनुचित दबाव बनाने लगा।
अन्याय के आगे नहीं झुकी महिला, तो पार कीं क्रूरता की हदें
पीड़िता का आरोप है कि जब उसने इस तानाशाही के आगे घुटने टेकने से इनकार कर दिया, तो पुलिसकर्मी ने अपनी वर्दी की मर्यादा को ताक पर रख दिया। उसने महिला के साथ सरेआम गाली-गलौज की और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस झूमाझटकी में महिला का सौभाग्य का प्रतीक ‘मंगलसूत्र’ भी टूट गया और उसे थाने परिसर में बेरहमी से घसीटा गया।
मामले में संवेदनशीलता और बढ़ जाती है क्योंकि पीड़िता का पति बीते शुक्रवार से रहस्यमय ढंग से लापता है। पीड़ित महिला ने गांव के सरपंच काशीराम पर संदेह जताते हुए आशंका व्यक्त की है कि उसके पति को गायब कराने या उसके साथ मारपीट कराने में सरपंच का हाथ हो सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि इस संगीन मामले में जिला पुलिस प्रशासन दोषी पुलिसकर्मी और आरोपियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।









